
देवघर रोपवे हादसे में फंसे सभी लोगों को निकाल लिया गया है। अब उन लोगों की खौफनाक आपबीती सामने आ रही है। हादसे के बाद तीन दिन तक ट्रॉलियों में फंसे लोगों की हालत यह थी कि इसी में टॉयलेट करते थे। तनाव की वजह से शौच का भी संकट उत्पन्न हो गया था। उन्हें शौच आने का एहसास भी नहीं हो रहा था। रामनवमी को लेकर रविवार को पश्चिम बंगाल के मालदा से एक साथ आठ सैलानियों का जत्था बाबाधाम आया था। बाबा वैद्यनाथ की पूजा-अर्चना कर सभी त्रिकूट पहाड़ पर रोपवे घूमने गए थे। सभी सैलानी रविवार अपराह्न 4 बजे रोपवे की ट्रॉली में सवार हुए थे। उसके कुछ देर बाद ही हादसे की वजह से सभी वहीं फंसे रह गए।
बिना अन्न-पानी के दो दिन तक फंसे रहे ट्रॉली में
रोपवे की ट्रॉली में लगभग 22 घंटे तक फंसे रहे सैलानी विनय कुमार दास ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि जोरदार झटके के बाद ट्रॉलियां कुछ देर के बाद स्थिर हो गई और हवा में सभी लोग झूलने लगे। कुछ देर बाद पता चला कि रोपवे में खराबी आ गई है। उन्होंने कहा कि उनकी ट्रॉली में चार लोग सवार थे। जब रात होने लगी तो डर बढ़ने लगा। खाने-पीने का कोई साधन भी नहीं था। बोतल में जो उनके पास पानी था, वह सभी पी चुके थे। उसके बाद उनलोगों तक रात में भी खाना-पानी कुछ नहीं पहुंचा।
अपना पेशाब पीने की थी नौबत
हजारों फीट की उंचाई पर हवा लटकती ट्रॉली में एक-एक पल काटना मुश्किल हो रहा था। दहशत के बीच रात वहीं बीतने लगी। उस क्रम में उन्हें टॉयलेट लगने पर उनलोगों को कोई जगह नहीं मिलने पर चारों लोगों ने पानी की खाली बोतल में ही टॉयलेट किया। उनकी स्थिति ट्रॉली में यह हो गई थी कि और थोड़ी देर अगर पानी नहीं मिलता तो बोतल में रखे यूरीन को ही पीकर अपनी जान बचाने की कोशिश करते।
ड्रोन की मदद से मिला पानी
किस्मत अच्छी थी कि अगले दिन सोमवार को ड्रोन की मदद से पानी मिला। बताया कि करीब 22 घंटे तक उन सभी को ट्रॉली में रहना पड़ा। उस दौरान जान जाने का भी हमेशा डर बना रहा। उन्होने कहा कि बाबा भोलेनाथ की कृपा से जान बच गई यह भाग्य की बात है। एयरफोर्स के जवानों द्वारा हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया। वहां से 24 घंटे के बाद मंगलवार दिन के 2 बजे उनलोगों को छुट्टी दे दी गई। अब सभी अपने घर वापस लौट गए हैं।