
पिताश्री के नाम पर गोल्ड मेडल अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर में हर वर्ष दिया जाता हैं
टीवी -36 हिन्दुस्तान : शशिभूषण सोनी की रिपोर्ट
अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर का दीक्षांत समारोह बहतराई स्टेडियम परिसर में उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू के अभाषी उपस्थिति में एवं कुलाधिपति अनूसुईयां उइके की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। समारोह में मेधावी छात्र-छात्राओं सहित विद्यार्थियों को स्वर्ण एवं डिग्री से अलंकृत किया गया । यह जानकर अत्यंत हर्ष है कि इस तृतीय दीक्षांत समारोह में बीकाम में सर्वोच्च अंक हासिल करने वाली तीनों छात्राओं को हमारे प्रिय मित्र एवं सीएमडी कालेज बिलासपुर में पदस्थ प्रोफेसर राजेश शुक्ला के पिताश्री दयानंद शुक्ला की स्मृति में गोल्ड मेंडल दिया गया । यह मेडल दीक्षा अग्रवाल को डॉक्टर निर्मल शुक्ला : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर में सीनियर एडवोकेट ने मुस्कान अग्रवाल को खारंग जलसंसाधन विभाग में कार्यपालन अभियंता : आर• पी• शुक्ला एवं सीएमडी कालेज बिलासपुर में प्राध्यापक वाणिज्य डॉक्टर राजेश कुमार शुक्ला ने और प्रियंका विश्वकर्मा को रेल्वे सिविल डिवीजनल अधिकारी ऋषि शुक्ला ने प्रदान किया । मातापिता के सेवा संस्कारों से पोषित ब्राम्हण समाज के लिए चारों पुत्र अनुकरणीय और समाज के लिए उदाहरणीय हैं । अपने-अपने क्षेत्रों मे समर्पित होकर यश, कीर्ति और प्रसिद्धि अर्जित कर रहे हैं । प्रेम के धागों से बुना हुआ शुक्ला परिवार के पूज्य श्रद्धेय डी • एन• शुक्ला के यादों को “गोल्ड मेडल” के रुप में देकर जीवन-भर के लिए विद्यार्थियों के साथ रिश्तों को अटूट संबंध बना दिया ।

शुक्ला परिवार के बीच सद्भाव , स्नेह और सहयोग का ही परिणाम हैं कि अपनी आय में से कुछ राशि निकालकर धर्मार्थ कार्य के लिए दान किए । हमें भी शुक्ला परिवार की तरह धर्म और दान को सम्यक बनाकर परमार्थ कार्य अपने माता-पिता के लिए करना चाहिए ।
साहित्यकार एवं शासकीय महाविद्यालय चांपा के पूर्व प्राध्यापक शशिभूषण सोनी ने बताया कि जीवन-भर शिक्षा समाज के लिए समर्पित कर सुख देने वाले शिक्षाविद् पूर्व प्राचार्य दयानंद शुक्ला इस युग में दधीचि के वाहक ही प्रतीत होते हैं । गुरु घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर में अध्ययन के दौरान अक्सर मित्र राजेश शुक्ला से मिलने जाता तब बाबूजी से फुर्सत के क्षणों में घंटों वार्तालाप संवाद करने का अवसर मिलता था । उनकी प्रेम-प्यार की मनुहार बातें और हृदय की सुकोमल भावनाओं से समय घंटों कैसे निकल जाता था , पता ही नही चलता । मैं अपनी लेख, कविताएं, कहानी और पर्व विशेष पर छोटी-छोटी आलेख उन्हें बताता था तो वे आह्लादित हो जाते और आत्मिय भाव से आशिर्वाद देते थे । जीवन का-क्षण और रक्त का कण शिक्षा के प्रति समर्पित रहने वाले स्व दयानंद शुक्ला का जीवन सदैव प्रेरणा देता रहेगा ।
