Peter Brook : ब्रिटिश थिएटर के डायरेक्टर पीटर ब्रूक (Peter Brook) को किसी पहचान की जरूरत नहीं है. इस मशहूर निर्देशक का 97 साल की उम्र में निधन हो गया. दुनियभर की एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लिए वे एक बड़े इनफ्लुएंसर थे, जिनके जबरदस्त काम को दुनिया भर में सराहा गया था. भारतीय महाकाव्य महाभारतपीटर ब्रूक ने अंग्रेजी और फ्रेंच नाटक के रूप में यूरोप और अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों में पहुंचाया 1985 में वियतनाम में युद्ध चल रहा था तो ब्रुक ने पेरिस में महाभारत को रंगमंच पर पेश किया।
करीब नौ घंटे दर्शक एकटक नाटक देखते रहे। आखिर में ब्रुक ने पूछा कि क्या युद्ध संघर्ष खत्म कर सकता है? क्या वाकई नेताओं और लोगों के पास शांति और युद्ध के बीच किसी एक को चुनने का विकल्प होता है? तो पूरी दुनिया सन्न रह गई। ब्रुक कहते थे, हर दिन दुनियाभर में मूर्खतापूर्ण युद्धों से हो रही पीड़ा और दहशत के बारे में सुनते हैं। महाभारत करोड़ों लाशों की बात है और सबसे अहम बात यह है कि युधिष्ठिर अंत में कहते हैं कि ‘यह जीत एक हार है।’ यही युद्ध का असल सच है। पीटर को 2021 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।
व्यावसायिकता के आगे नहीं झुके
ब्रुक व्यावसायिकता के सामने नहीं झुकने की जिद की वजह से आम लोगों के बीच लोकप्रिय नहीं हो पाए। ब्रुक आखिरी दिनों तक भी काम करते रहे। 2017 में प्रकाशित टिप ऑफ द टंग किताब में ब्रूक लिखते हैं, थियेटर की हर शैली, डॉक्टर के पास जाने जैसी है।
रूसी माता पिता के बेटे थे पीटर ब्रूक
पीटर ब्रूक के माता-पिता मूल रूप से रूसी थे .उन्होंने केवल 17 साल की उम्र में निर्देशक के रूप में करना शुरू किया, साल 1945 में मात्र 20 साल की उम्र में वे सबसे कम उम्र के निर्देशक के रूप में वो रॉयल शेक्सपियर कंपनी (RSC) के निदेशक बनाए गए और साल 1947 में इंग्लैंड के रॉयल ओपेरा हाउस के मेन प्रोडक्शन में निदेशक के रुप में जिम्मेदारी संभाली.
किशोरवय में फिल्मों से जुड़े-
21 मार्च, 1925 लंदन में जन्मे ब्रुक के पिता एक कंपनी के निदेशक थे और मां विज्ञानी। महज 16 वर्ष की उम्र में स्कूल छोड़कर वे फिल्म स्टूडियो से जुड़ गए। ऑक्सफोर्ड से अंग्रेजी व विदेशी भाषाओं में स्नातक किया।