रायपुर। (Single use Plastic for alternative fuel) सिंगल यूज प्लास्टिक (एसयूपी) कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा करीब तीन साल पहले शुरू की गई मुहिम अब रंग लाने लगी है. राज्य में स्थापित सीमेंट कम्पनियां वैकल्पिक ईंधन के रूप में इसका इस्तेमाल कर रही हैं और नगरीय निकाय भी इसे बेचकर आर्थिक लाभ उठा रहे हैं.उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने इस महीने की एक तारीख से देशभर में सिंगल यूज प्लास्टिक के उत्पादों और इसके विक्रय पर रोक लगा दी है.
केंद्र ने इस साल 4 जून को राज्यों को एसयूपी को चरणबद्ध रूप से खत्म करने व इसके सुरक्षित निपटान के लिये एक एडवाइजरी भी जारी किया था. इसमें कहा गया था कि राज्य स्थानीय निकायों की मदद से प्लास्टिक कचरे से वैकल्पिक ईंधन बनाने एवं इसका इस्तेमाल करने के लिये अपने राज्यों में स्थापित सीमेंट कम्पनियों से एमओयू करें. सीमेंट कम्पनियां कचरा संग्रहण केंद्रों से 200 किलोमीटर तक का परिवहन खुद करेंगी.(Single use Plastic for alternative fuel) काबिलेगौर है कि यह व्यवस्था छत्तीसगढ़ सरकार ने करीब तीन साल पहले ही शुरू कर दी थी और इसके लिये व्यापक स्तर पर अभियान भी चलाया गया था.
राज्य में अधिकांश बड़ी सीमेंट कम्पनियों के संयंत्र हैं. वर्तमान में अल्ट्राटेक, डालमिया, सेंचुरी, एसीसी, अंबुजा और श्री सीमेंट सहित करीब 10 संयंत्रों में फर्नेस फ्यूल के रूप एसयूपी से वैकल्पिक ईंधन तैयार हो रहा है. सीमेंट निर्माताओं के मुताबिक वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल से उनके फ्यूल खर्च लागत में लगभग 20 फीसदी की कमी आई है.प्रदेश के कई नगरीय निकायों का सीमेन्ट कम्पनियों के साथ करार हुआ है, इनमें रायपुर नगर निगम भी शामिल है. निकायों द्वारा एकत्रित कचरे में करीब 30 प्रतिशत हिस्सा सिंगल यूज प्लास्टिक का होता है.
(Single use Plastic for alternative fuel) कचरे को एक जगह इकट्ठा करने के बाद उनकी छटनी होती है. गीले कचरे से खाद बनाई जाती है, कुछ अन्य कचरे को रिसायकल कर मोटे प्लास्टिक और कांच की सामग्रियां बनाईं जाती हैं जबकि एसयूपी को सीमेंट कम्पनियों को बेच दिया जाता है.रायपुर नगर निगम द्वारा एकत्रित किया गया पूरा एसयूपी कचरा बलौदाबाजार स्थित सीमेंट कम्पनियों में ही खप जाता है.
रायपुर में प्रतिदिन औसतन 575 टन कचरा इकट्ठा होता है, इसमें गीला और सूखा दोनों कचरा शामिल है. सीमेंट कम्पनियां इकट्ठा किया एसयूपी कचरा स्वंय अपने संयंत्र ले जाती हैं. (Single use Plastic for alternative fuel) इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. नगर निगम ने वित्त वर्ष 2021-22 में सीमेंट संयंत्रों को प्लास्टिक कचरा बेचकर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है. चालू वित्त वर्ष में कचरे से होने वाली आय में और इजाफा होने की सम्भावना है.
(Single use Plastic for alternative fuel) सीमेंट संयंत्रों में प्लास्टिक कचरे की काफी मांग है. एसयूपी कचरे से बनने वाले ईंधन की लागत कम होती है साथ ही सीमेंट संयंत्रों में इसका निपटान भी काफी सुरक्षित तरीके से हो जाता है. छत्तीसगढ़ के लगभग सभी सीमेंट संयंत्रों में एसयूपी से वैकल्पिक ईंधन बनाया जा रहा है. केवल दूर-दराज के संयंत्र जहाँ आपूर्ति ज्यादा नहीं होती वहां इस ईंधन का उत्पादन कम है, बाकि संयंत्रों में ज्यादा ईंधन बन रहा है. पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी समय-समय पर इसका निरीक्षण कर जानकारी लेते रहते हैं.