श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को हरियाली तीज मनाया जाता है l ऐसी मान्यता है की माता पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए इस तिथि को व्रत किया था lइसी विश्वास के साथ कुवांरी लड़कियां मनोवांछित वर पाने के लिए और सौभाग्यवती स्त्रियाँ पति की लम्बी उम्र के लिए ये व्रत करती है l इस दिन स्त्रियाँ निर्जला व्रत रख कर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते है और शाम को व्रत की कथा सुन पारण करते है lइसे कजली तीज, श्रावणी तीज या मधुश्रवा तीज भी कहते है l
सिंजारा –– हरियाली तीज के एक दिन पहले सिंघारा मनाने की परंपरा होती है। जिसमें ससुराल पक्ष तरफ से नवविवाहित महिलाओं के लिए कपड़े, आभूषण, श्रृंगार के सामान और मिठाईयां भेजी जाती है।–
हरियाली तीज पर सभी सुहागिन महिलाएं एकत्रित होक झूला झूलती हैं और मंगल गीत गाती हैं। तीज पर्व के 1 दिन पहले ही विवाहित महिलाएं तथा कन्याएं अपने हाथों में मेहदी लगाकर इसको मनाती हैं।
क्यों मानते है तीज –
शिव और पार्वती के पुनर्मिलाप के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले हरियाली तीज के त्योहार के बारे में मान्यता है कि मां पार्वती ने 107 जन्म लिए थे भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए।
अंततः मां पार्वती के कठोर तप और उनके 108वें जन्म में भगवान ने पार्वतीजी को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से मा पार्वती प्रसन्न होकर पतियों को दीर्घायु होने का आशीर्वाद देती हैं।इस त्योहार पर विवाह के पश्चात पहला सावन आने पर नवविवाहिता को ससुराल में नहीं छोड़ा जाता है अत: उन्हें ससुराल से मायके बुला लिया जाता है। तब ससुराल से इस त्योहान पर सिंजारा भेजा जाता है जिसमें नए वस्त्र आभूषण, श्रृंगार सामग्री तथा मेहदी और मिठाई भेजी जाती है। यह पर्व हरियाली तीज से 1 दिन पहले सिंजारा के रूप में मनाया जाता है। इस व्रत को निर्जला किए जाने का विधान है।
पूजन विधि :
इसमें पत्निया निर्जला व्रत रखती हैं। हाथों में नई चूड़िया, मेहंदी और पैरों में अलता लगाती हैं, जो सुहाग का चिह्न माना जाता है और नए वस्त्र पहनकर मा पार्वती की पूजा अर्चना करती हैं। यह व्रत केवल महिलाओं तक ही सीमित नहीं होता, बल्कि कई जगहों पर पुरुष मां की प्रतिमा को पालकी पर बैठाकर झाकी भी निकालते हैं।इस दिन हरे रंग के वस्त्र और चूड़ियाँ पहन कर सोलह श्रींगार करने का बहुत महत्त्व है l
हरा रंग बुध का प्रतीक है जिससे हरे रंग से श्रींगार करने पर बुध का शुभ फल प्राप्त होता है और संतान सुख की कामना पूर्ण होती है lहरियाली तीज 2022 शुभ मुहूर्ततृतीया तिथि प्रारम्भ – जुलाई 31, 2022 को 02:59 AM सेतृतीया तिथि समाप्त – अगस्त 01, 2022 को 04:18 AM बजेतीज का पर्व तो पूरे दिन ही रहेगा इसलिए अगर आप विशेष समय में व्रत नहीं कर पाए तो 31 जुलाई को 2:59 AM के बाद कभी भी पूजा कर सकते हैं.