पूरा देश आजादी के 75 साल पूरे होने पर जश्न मना रहा तो वहीं दूसरी ओर रक्षाबंधन के पर्व को भी लोग बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मना रहे है पर यूपी के संभल जिले में एक ऐसा गांव हैं, जहां पर भाई-बहन का पावन पर्व रक्षाबंधन नहीं मनाया जाता है। इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है कि किस कारण की वजह से रक्षाबंधन नहीं मनाया जाता है।
शहर के गांव बेनीपुरचक में रक्षाबंधन नहीं मनाने की ये परंपरा काफी समय से चली आ रही है। हैरान करने वाली बात तो यह है कि अरसे से चली आ रही ये परंपरा अभी तक कायम है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकतम यादव जाति की आबादी वाले इस गांव के लोगों के पूर्वज मूलरूप से अलीगढ़ जिले के सिमरगई गांव में रहते थे। लोगों के अनुसार उस गांव में यादव और ठाकुर जाति के लोग साथ-साथ प्रेम से रहते थे। रक्षाबंधन पर यादव जाति की लड़की ने अपने रिश्ते के मुंहबोले भाई एक ठाकुर लड़के को राखी बांधी और दक्षिणा में घोड़ा ले लिया।वहीं दूसरी ओर इस गांव की एक ठाकुर लड़की ने यादव लड़के को राखी बांधी और उपहार स्वरूप पूरा सिमरई गांव मांगा।
जिसके बाद यादव लड़के ने अपनी जमींदारी का पूरा गांव राखी बांधने वाली मुंह बोली बहन को दे दिया। परंतु दक्षिणा में दिया जा चुका था और दी हुई चीज पर अपना कोई हक नहीं बचता। जिसके बाद सिमरई गांव के यह लोग बेनीपुरचक गांव में आकर बस गए।
राखी बांधने के बदले कोई अब संपत्ति न मांग ले इस वजह से गांव के लोग रक्षाबंधन पर राखी नहीं बंधवाते हैं। इतना ही नहीं इस गांव में दूसरे गांव से शादी होकर आई युवती भी अपने भाई को राखी बांधने अपने मायके नहीं जाती है।