कोरबा पसान / आज़ादी के 75वीं वर्षगाँठ पर आज़ादी गौरव यात्रा विधायक प्रतिनिधि आनन्द मित्तल के नेतृत्व विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। आज़ादी गौरव यात्रा आज़ादी के लिए शहीद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों वीर जवानों की गाथा जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से सैंकड़ों वर्षों तक अंग्रेजों के राज हिन्दुस्तानियों का नरसंहार स्वतंत्रता के लिये अंग्रेजों के विरुद्ध आन्दोलन एक अहिंसक आन्दोलन सशस्त्र क्रान्तिकारी आन्दोलन भारत की आज़ादी के लिए 1857 से 1947 के बीच हुए प्रयत्न स्वतंत्रता का सपना संजोये क्रान्तिकारियों शहीदों की सबसे अधिक प्रेरणादायी सिद्ध हुई क्रांतिकारी आंदोलन भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग भारत की धरती भक्ति मातृ-भावना उस युग में थी, उतनी कभी नहीं रही। मातृभूमि की सेवा मर-मिटने की भावना उस समय थी,उसका नितान्त अभाव हो गया है।
भारत को मुक्त कराने अंग्रेज़ी राज्य की स्थापना के साथ ही सशस्त्र विद्रोह का आरम् बंगाल में सैनिक-विद्रोह,चुआड़ विद्रोह,सन्यासी विद्रोह,विद्रोहों की परिणति सत्तावन के विद्रोह के रूप में हुई।
प्रथम स्वातन्त्र्यदृसंघर्ष असफल होने पर भी विद्रोह की अग्नि ठण्डी नहीं हुई। शीघ्र कुछ वर्षों के बाद पंजाब मे विद्रोह महाराष्ट्र में वासुदेव बलवन्त फड़के के छापामार युद्ध शुरू हो गए।बंगाल में क्रान्ति की अग्नि सतत जलती रही। सरदार अजीत सिंह सत्तावन के स्वतंत्रतादृआन्दोलन की पुनरावृत्ति के प्रयत्न शुरू किया। रासबिहारी बोस शचीन्द्रनाथ सान्याल ने बंगाल, बिहार, दिल्ली, राजपुताना, संयुक्त प्रान्त व पंजाब से लेकर पेशावर तक की सभी छावनियों में प्रवेश कर 1915 में पुनः विद्रोह की सारी तैयारी कर ली। दुर्दैव यह प्रयत्न भी असफल हो गया। इसके नए-नए क्रान्तिकारी उभरते रहे। राजा महेन्द्र प्रताप उनके साथियों ने तो अफगान प्रदेश में अस्थायी व समान्तर सरकार स्थापित कर ली। सैन्य संगठन कर ब्रिटिश भारत से युद्ध भी किया।जापान में आज़ाद हिन्द फौज के लिए अनुकूल भूमिका बनाई।
सिंगापुर में आज़ाद हिन्द फौज संगठित हुई। सुभाष चन्द्र बोस इस कार्य को आगे बढ़ाया भारतभूमि पर अपना झण्डा गाड़ा। आज़ाद हिन्द फौज का भारत में भव्य स्वागत हुआ, भारत ब्रिटिश फौज की आँखें खोल दीं।नाविक विद्रोह तो ब्रिटिश शासन पर अन्तिम प्रहार था। अंग्रेज़,मुट्ठी-भर सैनिकों के बल पर नहीं, बल्कि भारतीय फौज के बल शासन कर रहे थे भारतीय जनता की सहानुभूति प्राप्त नहीं थी।अपने संगठन कार्यक्रम गुप्त रखते थे। अंग्रेज़ी शासन द्वारा शोषित जनता में उनका प्रचार नहीं था। अंग्रेजों के क्रूर अत्याचारपूर्ण अमानवीय व्यवहारों से ही उन्हें इनके विषय में जानकारी मिली। विशेषतः काकोरी काण्ड के अभियुक्त तथा भगतसिंह उसके साथियों ने जनता का प्रेम सहानुभूति अर्जित की। भगतसिंह ने अपना बलिदान क्रांति के उद्देश्य के प्रचार के लिए ही किया जनता में जागृति लाने का कार्य महात्मा गांधी के व्यक्तित्व ने किया। सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी कमला दासगुप्त ने कहा कि क्रांतिकारी निधि थी “कम व्यक्ति अधिकतम बलिदान“, महात्मा गांधी की निधि थी “अधिकतम व्यक्ति न्यूनतम बलिदान“। सन् 42 के बाद अधिकतम व्यक्ति तथा अधिकतम बलिदान का मंत्र दिया। भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति में क्रांतिकारियों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है।
पसान में गौरव यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए विभिन्न स्थानों पर यात्रा का स्वागत भी किया गया भारत माता की जयघोष वीर शहीदों के जयकारों से क्षेत्र गुंजायमान नजर आया आजादी के 75वे वर्षगाँठ पर काँग्रेस पदयात्रा में मुख्य रूप से विधायक प्रतिनिधि शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष आनन्द मित्तल, रैली में प्राचार्य आर पी सिंह,एच एम एस कुजूर,पीटीआई आईएस आयाम, सीएसी एसएस तिग्गा शिक्षक गण बीएस उईके, एमएस मरकाम,के के तिवारी, टी एस कोर्चे, शाहनवाज बेगम, जानकी सिंह,अनीता जांगड़े, चंद्रप्रभा यादव, सुहानी जयसवाल,ए खंडेल, विनोद कुमार एवं क्षेत्र के वरिष्ठ प्रबुद्ध जन शिक्षक शिक्षिकाएं बालक बालिकाएं क्षेत्रीय कांग्रेसी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।