फिलहाल सीबीएसई और आईसीएसई के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों में स्टेट बोर्ड एग्जाम्स का लेवल अलग-अलग है। इससे बच्चों के स्कोर में भी बड़ा अंतर आता है, जिससे उनका एक समान स्तर पर आंकलन नहीं हो पाता है।
NEET, JEE, CUET के बाद अब बोर्ड एग्जाम्स में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भारत सरकार इसकी तैयारियों में लगी है। इसके लिए एक नई परीक्षा नियामक संस्था PARAKH बनाई गई है। ऐसा करने के पीछे केंद्र सरकार का एक ही उद्देश्य है- देशभर में Board Exams समानता लाना।
10वीं और 12वीं क्लास के लेवल पर छात्रों का मूल्यांकन करने के लिए एक समान फ्रेमवर्क तैयार करना।शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि राज्यों के साथ जितनी चर्चाएं हुईं, उनमें ये बात सामने आई की ज्यादातर राज्य साल में दो बार बोर्ड एग्जाम कराने के NEP के प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं। इनमें से एक परीक्षा की मदद से बच्चों को अपना स्कोर बेहतर करने में मदद मिलेगी।वहीं मैथ्स में दो तरह के पेपर ऑफर करने पर भी राज्य सहमत हैं। एक स्टैंडर्ड मैथ्स और दूसरा हाई लेवल कंपीटेंसी वाला Maths।
शिक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ‘इससे बच्चों में मैथ्स का डर कम हो सकेगा और वो सीखने के लिए प्रोस्ताहित होंगे।’बोर्ड एग्जाम्स को एक समान बनाने के केंद्र के प्लान पर बीते कुछ महीनों से काम चल रहा है। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी एनसीईआरटी ने राज्यों के स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी एससीईआरटी के साथ कई मीटिंग की है। इन बैठकों के निष्कर्ष स्वरूप एक नया असेसमेंट रेगुलेटर बनाया जा रहा है, जिसका नाम है परख।
परख यानी परफॉर्मेंस असेसमेंट, रिव्यू एंड एनालिसिस ऑफ नॉलेज फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट। ये संस्था एनसीईआरटी के एक अंग के रूप में काम करेगी। नेशनल अचीवमेंट सर्वे यानी NAS और स्टेट अचीवमेंट सर्वे SAS कराने की जिम्मेदारी भी परख की ही होगी। परख राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का भी हिस्सा है।परख देश के सभी मान्यता प्राप्त स्कूल बोर्ड्स के लिए स्टूडेंट्स के असेसमेंट के लिए एक समान नियम, स्टैंडर्ड, गाइडलाइन तैयार करेगा। असेसमेंट का पैटर्न कुछ ऐसा रखा जाएगा जिससे बच्चों में 21वीं सदी में जरूरी स्किल्स विकसित की जा सके और उसका मूल्यांकन किया जा सके।