छत्तीसगढ़:–कस्तूर ग्राम पंचायत स्थित माध्यमिक शाला से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। जिस स्कूल को अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ाई और भविष्य निर्माण के लिए शिक्षा का मंदिर मानकर भेजते हैं, उसी स्कूल में बच्चों से पढ़ाई की बजाय मजदूरी कराई जा रही है।

विद्यालय परिसर में बच्चे पानी भरते हुए, बर्तन साफ करते हुए, सब्जी काटते हुए और भारी बर्तनों में पानी लेकर आते हुए नजर आए। यह सब उस समय हो रहा था जब स्कूल के मास्टर और प्रधान पाठक आराम फरमाते दिखाई दिए, और बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा व नियमों का कोई ध्यान नहीं रखा गया।

मध्यान्ह भोजन योजना के तहत स्पष्ट निर्देश हैं कि बच्चों से किसी भी प्रकार का रसोई या शारीरिक श्रम नहीं कराया जाएगा। इसके बावजूद माध्यमिक शाला में बच्चों से काम कराना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बचपन के अधिकारों पर सीधा हमला भी है।

अभिभावकों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उनका साफ कहना है—

“हम अपने बच्चों को शिक्षा के लिए स्कूल भेजते हैं, मजदूर बनाने के लिए नहीं।”

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर शिक्षा के नाम पर बच्चों का यह शोषण यूँ ही चलता रहेगा।

