नई दिल्ली:– सुप्रीम कोर्ट में आज महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई है। कांग्रेस नेता जया ठाकुर की ओर से ये याचिका दायर की गई है। संसद के विशेष सत्र से पहले सर्वोच्च अदालत में ये मामला पहुंचा है।
संसद के आगामी विशेष सत्र से पहले महिला आरक्षण विधेयक का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। सर्वोच्च न्यायालय में आज महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई है। शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड की गई मुकदमे की सूची के अनुसार, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की पीठ कांग्रेस नेता जया ठाकुर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करने वाली है।
कांग्रेस नेता की याचिका में क्या है
याचिका में यह तर्क दिया गया है कि महिलाओं के लिए एक तिहाई कोटा का फायदा स्थगित नहीं किया जाना चाहिए और इसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम को तत्काल लागू करने की मांग की गई है। ये बिल लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण का प्रावधान करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था
नवंबर 2023 में, शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की थी कि कानून में उस प्रावधान को रद्द करना बहुत मुश्किल होगा, जिसमें यह निर्धारित किया गया है कि महिलाओं के लिए कोटा अगली दशकीय जनगणना और उसके बाद परिसीमन अभ्यास के पूरा होने के बाद ही लागू होगा। याचिका में यह तर्क दिया गया था कि ऐसी पूर्व शर्तें आवश्यक नहीं हैं क्योंकि सीटों की संख्या पहले से ही निर्धारित है। ऐसे में देश की लगभग आधी आबादी वाली महिलाएं निर्वाचित निकायों में कम प्रतिनिधित्व वाली बनी हुई हैं।
महिला आरक्षण को लेकर पीएम मोदी का लेटर
सुप्रीम कोर्ट में आज लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई है। ये इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि संसद में 16 अप्रैल से शुरू होने वाले विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक पर चर्चा होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके लिए संसद के दोनों सदनों में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र लिखा है।
प्रधानमंत्री के पत्र में क्या है
अपने पत्र में प्रधानमंत्री ने 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले महिला आरक्षण कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने के लिए इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने हेतु समर्थन मांगा है।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत के विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के लिए विधायी निकायों में महिलाओं की अधिक भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि देश भर में इस कानून को इसके सही अर्थों में लागू करने का समय आ गया है।
कांग्रेस ने संसद के विशेष सत्र की टाइमिंग पर उठाए सवाल
हालांकि, संसद के प्रस्तावित विशेष सत्र पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। इसे तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनाव प्रचार के मद्देनजर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया है। कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि महिला आरक्षण के कार्यान्वयन पर कोई भी विधायी प्रक्रिया शुरू करने से पहले परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
