मध्य प्रदेश :– शासकीय स्कूलों में शिक्षा को आधुनिक और बेहतर बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की जा रही है। अब शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित रोबोट की मदद ली जाएगी। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इंदौर, भोपाल, जबलपुर सहित कई जिलों को पत्र जारी कर स्कूलों के चयन के निर्देश दिए हैं। इंदौर के लिए विजय नगर स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय का नाम रोबोटिक क्लास के लिए भेजा गया है।
अधिकारियों के मुताबिक जल्द ही उपकरण आने के बाद रोबोट की मदद से विद्यार्थियों को पढ़ाने का कार्य किया जाएगा। स्कूल में रोबोटिक लैब की तरह इसे बनाया जाएगा। जिसमें 100 से अधिक उपकरण शामिल होंगे। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई करने में आसानी होगी। इस योजना के तहत शुरुआत में कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए रोबोटिक क्लास शुरू की जाएगी। डीपीसी संजय मिश्रा ने बताया कि भोपाल से रोबोटिक क्लास शुरू करने के लिए एक स्कूल का चयन करने के लिए कहा गया था। हमने चयन कर जानकारी भेज दी है।
100 से अधिक विद्यार्थी वाले स्कूलों को करेंगे शामिल
रोबोटिक क्लास उन स्कूलों में शुरू की जाएगी, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या 100 से अधिक है। साथ ही स्कूल में एक बड़ा हाल और एक अलग कमरा होना भी जरूरी होगा, ताकि रोबोटिक क्लास को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सके। शिक्षक रोबोट के साथ मिलकर बच्चों को मार्गदर्शन देंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी विद्यार्थी इस नई तकनीक का सही तरीके से लाभ उठा सकें।
रोबोट से बढ़ेगी विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता
अधिकारियों के मुताबिक एआई रोबोट की खास बात यह होगी कि वह केवल पढ़ाएगा ही नहीं, बल्कि बच्चों के सवालों का तुरंत जवाब भी देगा। यदि किसी छात्र को कोई विषय समझ में नहीं आता है, तो रोबोट उसे आसान और सरल भाषा में दोबारा समझा सकेगा। इससे विद्यार्थियों को कठिन विषयों को समझने में काफी मदद मिलेगी और उनकी सीखने की क्षमता भी बढ़ेगी।
आडियो-विजुअल तकनीक का होगा उपयोग
रोबोट के माध्यम से पढ़ाई को और अधिक रोचक बनाने के लिए स्मार्ट स्क्रीन और ऑडियो-विजुअल तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इससे बच्चों को किताबों के अलावा वीडियो, ग्राफिक्स और एनिमेशन के जरिए भी पढ़ने का मौका मिलेगा। खासतौर पर विज्ञान और गणित जैसे विषयों को प्रैक्टिकल तरीके से समझाने में यह तकनीक काफी सहायक साबित होगी।
अधिकारियों के मुताबिक इस पहल का मुख्य उद्देश्य शासकीय स्कूलों के बच्चों को भी आधुनिक तकनीक से जोड़ना है, ताकि वे निजी स्कूलों के विद्यार्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। इसके साथ ही बच्चों में डिजिटल लर्निंग के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे नई तकनीकों को समझने में सक्षम बनेंगे।
