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    मणिपुर के इंफाल में एयरपोर्ट कंट्रोलर्स को दिखाई दी यूएफओ, क्या सच में है एलियंस का अस्तित्व…

    By Tv 36 HindustanNovember 20, 2023No Comments6 Mins Read
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    मणिपुर के इंफाल में एयरपोर्ट कंट्रोलर्स को कुछ ऐसी चीजें दिखाई दीं, जिसके बाद हवाई अड्डे पर हाई अलर्ट घोषित करना पड़ा. तीन फ्लाइट्स को रोका गया और वहां लैंड करने वाली दो फ्लाइट्स को कोलकाता की तरफ डायवर्ट कर दिया गया. शुरुआती रिपोर्ट्स की मानें तो यह अज्ञात वस्तु कुछ और नहीं बल्कि यूएफओ हो सकती है. अब सवाल ये है कि इस बात में कितनी सच्चाई है? क्या सच में एलियंस का अस्तित्व है? या फिर वो चीन का कोई जासूसी ड्रोन था.दुनिया में कई बार लोग एलियन और यूएफओ को देखने का दावा कर चुके हैं. सालों से वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक कोई सफलता नहीं मिल सकी है.

    इसे लेकर अमेरिकी रक्षा विभाग ने आसमान में नजर आने वाले यूएफओ के रहस्य से पर्दा उठाया है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने बीते कुछ सालों में सैकड़ों यूएफओ वीडियो और फोटो की जांच की है. आइए जानते हैं कि इस जांच में क्या खुलासा हुआ है.

    अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यूएफओ केवल विदेशी सर्विलांस ऑपरेशन या हवा में तैरने वाली चीजें हैं. अमेरिकी सरकार अब यूएफओ को यूएपी कहती है. अमेरिका अधिकारियों का कहना है कि कई यूएपी घटनाओं की पहचान आधिकारिक तौर पर सामान्य चीनी सर्विलांस ड्रोन के तौर पर हुई है.अमेरिका चीन पर लगा चुका है गंभीर आरोपअमेरिका का आरोप है कि चीन ने पहले अमेरिकी एडवांस फाइटर प्लेन की योजना को चुरा लिया था और अब वह अमेरिकी पायलटों को कैसे ट्रेनिंग दी जाती है यह जानना चाहता है.

    इसी साल फरवरी में चीनी जासूसी गुब्बारे को अमेरिकी सेना ने अपने हवाई इलाके में घुसते वक्त गिरा दिया था. अमेरिकी सेना के अनुसार, गुब्बारे का आकार तीन बसों के बराबर था.गुब्बारे के बारे में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि उसपर सिग्नल लगे हुए थे, जो खुफिया जानकारी इकट्ठे करने के काम आता है. जासूसी गुब्बारे में कई एंटीना थे, जिससे भूमि की पहचान की जा सकती थी. हालांकि, अमेरिका के आरोपों पर चीन ने कहा था कि वह एक नागरिक हवाई जहाज था, जिसका इस्तेमाल मौसम की जांच के लिए किया जाता है.इंग्लैंड ने पेश किए चीन के जासूसी ‘UFO’ के सबूतइंग्लैंड की मीडिया ने चीन के जासूसी के बारे में नए सबूत पेश किए. इसमें जापान-ताइवान की घटनाएं भी शामिल हैं.

    बता दें, कुछ महीने पहले अमेरिकी सेना ने अपने तटीय इलाके के पास एक चीनी जासूसी गुब्बारा मारकर गिराया था, जिससे अमेरिका-चीन के रिश्तों में तनाव पैदा हो गए थे. पूर्वी एशिया के पास भी चीनी जासूसी गुब्बारों की कई तस्वीरें मिली. फोटो से मिले सबूत इशारा करते हैं कि गुब्बारा मंगोलिया से सटे चीनी इलाके से लॉन्च किए गए थे.ताइवान के बारे में ऐसे मिला सबूतसितंबर 2021 में एक गुब्बारा ताइवान के तटीय इलाकों के पास दिखाई दिया. जांच से खुलासा हुआ कि फरवरी में अमेरिका में घुसा गुब्बारा मोंटाना राज्य के परमाणु वायुसेना अड्डे से करीब 130 किमी ही दूर था.क्या मणिपुर में चीन का जासूसी ड्रोन ?

    इंफाल में दिखने वाले UFO भी पड़ोसी चीन का जासूस ही लगता है क्योंकि जिस तरह से चीन लगातार दुनिया अलग-अलग देशों में अपने जासूसी UFO जैसे दिखने वाले गुब्बारे भेज चुका है. चीन पर सवाल इसलिए भी खड़े होते हैं क्योंकि चीन ने मणिपुर के नजदीक म्यांमार के कोको द्वीप को अपनी जासूसी गतिविधियों का अड्डा बना लिया है. यहां रनवे, हैंगर और सर्विलांस सिस्टम लगे हुए हैं. म्यांमार के कोको द्वीप पर चीन का सीक्रेट सैन्य अड्डा बन चुका है और इससे भारत की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं.

    कोको आइलैंड पर दिखी थी सैन्य निर्माण गतिविधियांइस साल जनवरी में मैक्सर टेक्नोलॉजी द्वारा ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में चौंकाने तथ्य भी सामने आए हैं. म्यांमार के नियंत्रण में शामिल कोको आइलैंड पर सैन्य निर्माण वाली गतिविधियां देखी गई. आशंका है कि चीन के इशारे पर म्यांमार ये निर्माण कर रहा है. असल में चीन हिंद महासागर तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए आसान विकल्प भी तलाशहै.कोको द्वीप समूह पर म्यांमार का नियंत्रण है. इस साल जनवरी में मैक्सर टेक्नोलॉजी द्वारा ली गई सैटेलाइट तस्वीरों से ग्रेट कोको द्वीप क्षेत्र में नई इमारतों का बनना सामने आया है. यहां इसके सेंटर में दो नए बने हैंगर देखे जा सकते हैं और इसके साथ ही उत्तर में भी कुछ नई इमारतें भी दिख रही हैं.

    रनवे की लंबाई भी बढ़ गईसंभव है कि नौसैनिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा बेस भी तैयार किया गया हो. तस्वीर में2300 मीटर लंबा रनवे भी देखा गया है, जो एक दशक पहले केवल 1300 मीटर का था. इस पूरे मामले पर सबसे पहले चैथम हाउस ने ध्यान आकर्षित कराया है. चैथम हाउस एक थिंक टैंक है जिसका हेडक्वार्टर लंदन में है.क्या म्यांमार की निर्माण गतिविधि में चीन भी शामिल?संभव है कि म्यांमार जुंटा द्वीप पर गुप्त रूप से समुद्र में निगरानी के चलाए जाने वाले अभियानों के तहत इस तरह की तैयारी कर रहा हो. इसमें अक्सर चीन की मिलीभगत रही है. ऐसे में इस तरह के निर्माण में भी संदेह जताया जा रहा है कि कहीं न कहीं इस गतिविधि में चीन शामिल है

    .चीन कर चुका है सैन्य उद्देश्यों के लिए द्वीप का इस्तेमालद्वीप पर चीन की इस तरह की रणनीतिक और संदेहजनक उपस्थिति कोई नई बात नहीं है. रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2009 मे भारत ने म्यांमार के सामने साल 2009 में इस मुद्दे को उठाया था. 1990 के दशक की शुरुआत में भी, चीन द्वारा सैन्य और नौसैनिक उद्देश्यों के लिए इन द्वीपों का उपयोग करने की खबरें लगातार आती रही हैं.मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस के 2014 के एक पेपर में कहा गया है कि चीन द्वारा अंडमान सागर में कम से कम मनौंग, हिंगगी, जादेतकी और म्यांमार में कोको द्वीप समूह में SIGINT श्रवण केंद्रों के बनाए जाने की रिपोर्ट है. यहां चीनी टेक्नीशियनों और प्रशिक्षकों ने यांगून, मौलमीन और मेरगुई के पास नौसैनिक ठिकानों और रडार से लैस नेवल बेस स्थापित करने के लिए काम किया है.

    चीनी मछुआरों के पास से मिली थी कई मशीनेंभारतीय तट रक्षक ने अंडमान द्वीप समूह से म्यांमार के झंडे लहराते हुए मछली पकड़ने वाले ट्रॉलरों को रोका है. निरीक्षण करने पर वे सभी चीनी नागरिक निकले, जिनके पास से चालक दल के रेडियो और गहराई में प्रयोग किए जाने वाले ध्वनि यंत्र मिले जो कि पनडुब्बी में उपयोग किए जाते हैं.डिफेंस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इंफाल में अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट (UFO) दिखने के बाद वायुसेना ने इसका पता लगाने के लिए 2 राफेल फाइटर प्लेन भेजे थे. इसके अलावा अपने एयर डिफेंस सिस्टम को भी फौरन एक्टिवेट कर दिया था. हालांकि अब तक की जांच में वायुसेना को कुछ हाथ नहीं लगा है.

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