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“नई दिल्ली:–* अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर लोगों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। राजधानी देहरादून से लेकर पूरे पहाड़ में लोग धामी सरकार और सिस्टम के खिलाफ आक्रोश जता रहे हैं। इसी कड़ी में अल्मोड़ा की दो सगी बहनों ने विरोध का एक ऐसा तरीका अपनाया है जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। इन बेटियों ने अपने ही खून से महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को चिट्ठी लिखकर इंसाफ की गुहार लगाई है।
सल्ट की रहने वाली कुसुम लता बौड़ाई और उनकी दसवीं में पढ़ने वाली छोटी बहन संजना ने यह पत्र उप जिलाधिकारी काशीपुर के जरिए भेजा है। उन्होंने सीधा सवाल किया है कि क्या रसूखदार लोगों और वीआईपी को अपराध करने की खुली छूट मिली हुई है। उनका कहना है कि जब देश की एक बेटी को न्याय के लिए इतना संघर्ष करना पड़ रहा है, तो बाकी बेटियां खुद को महफूज कैसे महसूस करेंगी।
अब कौन करेगा रक्षा
किसान मंच की प्रदेश प्रवक्ता और पहाड़ फाउंडेशन की अध्यक्ष कुसुम लता बौड़ाई ने इसे सत्ता की संवेदनहीनता बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सबूतों को मिटाने और ताकतवर लोगों को बचाने की कोशिशें न्याय की राह में रोड़ा बन रही हैं। वहीं, नन्ही संजना का कहना है कि अगर बड़े लोग गुनाह करके ऐसे ही बच निकलेंगे तो हम जैसे बच्चों की सुरक्षा कौन करेगा। उनका मानना है कि बेटियों को न्याय दिलाना केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और सरकार की जिम्मेदारी है।
महामहिम से मदद की गुहार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे अपने पत्र में संजना ने लिखा है कि अंकिता दीदी के साथ हुई घटना और उसके बाद न्याय में हो रही देरी ने मुझे और मेरी सहेलियों को अंदर तक डरा दिया है। उसने भावुक होकर लिखा कि क्या एक आम लड़की की जान इतनी सस्ती है और क्या वीआईपी को अपराध की छूट है। उसने राष्ट्रपति से एक महिला और अभिभावक के तौर पर इस मामले में दखल देने की मांग की है, ताकि आम इंसान से लेकर वीआईपी तक, सभी दोषियों को सख्त सजा मिल सके। उसने लिखा कि भारत माता की बेटियों को सुरक्षित महसूस करने का हक है।
