नई दिल्ली:– नेपाल के पीएम ने दुनिया के 17 देशों के राजदूतों की एक साथ बैठक बुलाई। इसमें भारत, चीन, अमेरिका के भी राजदूत शामिल हुए। माना जा रहा है कि इस बैठक के जरिए बालेन शाह ने बड़ा कूटनीतिक संकेत दिया है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह सत्ता संभालते हुए ऐक्शन में आ गए हैं। बालेन शाह ने पीएम बनने बाद भारत, चीन, अमेरिका समेत 17 देशों के राजदूतों की बैठक बुलाई। नेपाल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब सारे राजदूतों की एक साथ बैठक बुलाई गई। अब तक परंपरा थी कि नेपाली पीएम सारे राजदूतों से अलग-अलग मिलते थे। यही नहीं ठीक उसी दिन नेपाल के विदेश मंत्रालय ने सभी कैबिनेट मंत्रियों को साल 2011 से लागू नेपाल के राजनयिक कोड ऑफ कंडक्ट के बारे में भी बताया गया।
काठमांडू पोस्ट ने नेपाली विश्लेषकों के हवाले से बताया कि इस बैठक के जरिए बालेन शाहने यह संकेत दिया कि उनकी सरकार विदेश नीति पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है और व्यक्ति आधारित बैठक की बजाय सरकार के स्तर पर विदेशों के साथ संपर्क को बढ़ाना चाहती है। नेपाली पीएम ने इस कदम से साल 2006 से चली आ रही परंपरा को किनारे कर दिया है। साल 2006 से हर नेपाली प्रधानमंत्री ने अलग-अलग विदेशी राजदूतों से मुलाकात की।
यह एक सामान्य मुलाकात नहीं थी। यह एक रणनीतिक कूटनीतिक रीसेट ब्रीफिंग है। नेपाल प्रयास कर रहा है कि एक प्रतिक्रिया, व्यक्ति और पार्टी आधारित कूटनीति से आगे बढ़कर स्पष्ट और राज्य आधारित रवैया अपनाना चाहता है।
नेपाल के विदेशी मामलों के जानकार लंबे समय से इसकी आलोचना करते थे कि इस तरह की बैठकों में कोई नोट लेने वाला नहीं होता है। इससे दोनों के बीच हुई बातचीत सरकारी रेकॉर्ड में नहीं आ पाती है। बालेन शाह ने जिन देशों के राजदूतों के साथ मुलाकात की है, उनमें भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस, जर्मनी, सऊदी अरब, कतर, इजरायल, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, दक्षिण कोरिया, स्विटजरलैंड, मिस्र और संयुक्त राष्ट्र शामिल हैं। इस सामूहिक मुलाकात के बाद 11 देशों के राजदूतों से बालेन शाह ने अलग से मुलाकात की।
इस मुलाकात में सभी देशों के राजदूतों ने कहा कि वे नेपाल की नई सरकार को अपना पूरा समर्थन देते हैं। इस बैठक पर नेपाल के राजनीतिक सलाहकार असीम शाह ने कहा, ‘पहले ऐसी संस्कृति थी कि विदेशी राजदूत बहुत ज्यादा पीएम से मिलते रहते थे जो राजनयिक मानदंडों के खिलाफ था।’ बता दें कि केपी शर्मा ओली अक्सर चीनी राजदूत के इशारे पर काम करते थे। उन्होंने भारत विरोधी नक्शा जारी किया था। बालेन शाह ने 27 मार्च को शपथ ली थी। बालेन शाह ने भारतीय राजदूत से भी अलग से मुलाकात की।
बालेन शाह ने भारत, चीन और अमेरिका को क्या दिया संकेत?
बालेन शाह की पार्टी ने कहा है कि वह विदेश नीति में संतुलन बनाएगी। नेपाली विश्लेषकों का कहना है कि सारे राजदूतों को एक साथ बुलाना एक सामान्य बात नहीं है। यह एक तरह से संकेत है। वह भी तब जब भारत, चीन और अमेरिका के बीच प्रतिस्पर्द्धा बढ़ रही है। इससे बालेन शाह ने संकेत दिया कि वह न तो भारत, न चीन और न ही अमेरिका की ओर झुकाव रखते हैं।
