मध्य प्रदेश:– भोपाल से छोड़ी गई GPS टैग वाली सिनेरियस गिद्ध पाकिस्तान में खराब मौसम के कारण घायल हो गई. सिग्नल बंद होने पर भारत और पाकिस्तान की टीमों ने मिलकर रेस्क्यू किया. फिलहाल दोनों गिद्ध सुरक्षित बताए जा रहे हैं. इनका अभी इलाज जारी है.
भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में इलाज के बाद नई जिंदगी पाने वाली एक मादा ‘सिनेरियस वल्चर’ ने ऐसा सफर तय किया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. यह गिद्ध पहले शाजापुर के पास घायल हालत में मिला था, जहां वन विहार और BNHS की टीम ने उसका इलाज किया. पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद इसे GPS-GSM टैग लगाकर रायसेन के हलाली डैम से खुले आसमान में छोड़ा गया. इसके बाद यह प्रवासी यात्रा पर निकल पड़ी.
धीरे-धीरे यह गिद्ध मध्य प्रदेश से राजस्थान की ओर बढ़ती हुई आगे पाकिस्तान की सीमा में पहुंच गई. सब कुछ सामान्य चल रहा था और वैज्ञानिक इसकी हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थे. लेकिन 7 अप्रैल को अचानक पाकिस्तान के खानेवाल इलाके के पास इसका GPS सिग्नल बंद हो गया, जिससे भारत की टीम में चिंता बढ़ गई. अनुमान लगाया गया कि यह किसी मुश्किल में फंस सकती है.
क्यों घायल हो गए थे गिद्ध ?
तुरंत WWF-India ने WWF-Pakistan से संपर्क किया और पूरी जानकारी साझा की गई. इसके बाद पाकिस्तान के वन विभाग ने स्थानीय लोगों की मदद से सर्च ऑपरेशन शुरू किया. कुछ घंटों की तलाश के बाद गिद्ध को ढूंढ लिया गया. जांच में सामने आया कि उस दौरान इलाके में तेज आंधी और खराब मौसम आया था, जिसकी वजह से यह घायल हो गई थी.
पाकिस्तान में चल रहा इलाज
इसके साथ ही उसी क्षेत्र में एक और ‘यूरेशियन ग्रिफॉन’ गिद्ध भी घायल अवस्था में मिला. दोनों पक्षियों को सुरक्षित निकालकर पाकिस्तान के चंगा मंगा वल्चर कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर में रखा गया है. डॉक्टरों से मिली जानकारी के मुताबिक, दोनों की हालत अब स्थिर बताई जा रही है. उन्हें हल्की चोटें आई थीं. इलाज के बाद इन्हें फिर से जंगल में छोड़ा जाएगा. यह पूरा रेस्क्यू ऑपरेशन वन्यजीव संरक्षण में भारत-पाकिस्तान सहयोग की एक बड़ी मिसाल माना जा रहा है. वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे ट्रैकिंग मिशन से प्रवासी पक्षियों के रास्तों को समझने में मदद मिलती है और भविष्य में उनकी सुरक्षा के बेहतर उपाय बनाए जा सकते हैं.
