चंडीगढ़:– नगर निगम में भाजपा ने मेयर चुनाव जीत लिया है। गुरुवार सुबह 11 बजे मेयर पद के लिए मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें भाजपा ने जीत दर्ज की। अब सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए मतदान होना है। जानकारी के मुताबिक, सौरभ जोशी चंडीगढ़ के नए मेयर चुने गए हैं। उन्हें कुल 18 वोट मिले, जबकि आम आदमी पार्टी को 11 वोट और कांग्रेस को 7 वोट प्राप्त हुए।
नगर निगम में सुबह 11 बजे चुनावी प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें सबसे पहले कांग्रेस पार्षदों ने अपने वोट डाले। इस बार चुनाव बैलेट पेपर के बजाय हाथ उठाकर कराया गया। कांग्रेस के छह पार्षदों और सांसद मनीष तिवारी ने पार्टी के प्रत्याशी के समर्थन में वोट दिया।
सौरभ जोशी बने मेयर
आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस का समर्थन नहीं किया, जिसका फायदा भाजपा को मिला और सौरभ जोशी ने मेयर पद पर बाजी मार ली। भाजपा के सभी 18 पार्षदों ने सौरभ जोशी के समर्थन में हाथ खड़े किए, जबकि आप के 11 पार्षदों ने अपने प्रत्याशी को वोट दिया। वोटिंग के बाद कांग्रेस के सभी पार्षद नगर निगम परिसर से बाहर चले गए, क्योंकि उन्हें पहले से ही पार्टी की हार तय नजर आ रही थी।
मेयर पद पर जीत के बाद सौरभ जोशी भावुक नजर आए। साथियों ने उन्हें सहारा देकर उनकी सीट तक पहुंचाया। खास बात यह रही कि सौरभ जोशी अपने साथ अपने पिता की तस्वीर लेकर सदन में पहुंचे थे।
कांग्रेस ने किया बहिष्कार
मेयर चुनाव के बाद सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए मतदान कराया गया, लेकिन कांग्रेस ने इसका बहिष्कार किया। दरअसल, कांग्रेस के छह पार्षद मेयर चुनाव के दौरान ही सदन से बाहर चले गए थे। ऐसे में हुई वोटिंग में भाजपा के प्रत्याशी जसमनजीत सिंह को 18 वोट मिले, जबकि आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी को 11 वोट प्राप्त हुए। इसके साथ ही जसमनजीत सिंह चंडीगढ़ के नए सीनियर डिप्टी मेयर बन गए।
वोटिंग के दौरान आम आदमी पार्टी के मुन्नवर खान को 11 वोट मिले। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और पार्टी के पार्षद सदन में मौजूद नहीं थे, इसलिए कांग्रेस के सीनियर डिप्टी मेयर पद के उम्मीदवार सचिन गालव को एक भी वोट नहीं मिल सका। सचिन गालव खुद भी सदन में मौजूद नहीं थे, जिसके चलते वे अपना वोट भी नहीं डाल पाए।
नगर निगम में कुल 36 वोट
गौरतलब है कि चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 पार्षद हैं और इसके अलावा एक वोट सांसद का होता है, यानी कुल 36 वोट। इस चुनाव में कांग्रेस के पास 7 वोट थे, जबकि आम आदमी पार्टी को 11 पार्षदों का समर्थन हासिल था। वहीं भाजपा के पास सबसे ज्यादा 18 पार्षद हैं।
उल्लेखनीय है कि निगम चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन टूट चुका था। अगर यह गठबंधन कायम रहता, तो मेयर चुनाव में मुकाबला काफी रोचक और कांटे का हो सकता था।
