
बॉलीवुड की दुनिया में बसंती या पीले रंग को हमेशा ही भगत सिंह से जोड़ कर देखा गया है. लेकिन अब एक बार फिर ये पीला रंग भगत सिंह से जोड़ा जा रहा है, इस बार फिल्म नहीं बल्कि असली जिंदगी में.
पंजाब में हुए विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के साथ ही आम आदमी पार्टी ने सरकार बना ली है. कभी कॉमेडी करने वाले भगवंत मान अब पंजाब के मुख्यमंत्री हैं. आम आदमी पार्टी ने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार भगत सिंह के सपनों वाला भारत बनाने की बात कही. जिस दिन भगवंत मान ने शपथ ली, तो उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वह पीला या बसंती रंग ही पहनकर आएं, ताकि भगत सिंह को सम्मान दिया जा सके.
लेकिन क्या सच में भगत सिंह ने कभी पीली पगड़ी बांधी थी, क्या सच में पीला रंग ही भगत सिंह के साथ जुड़ता हुआ नज़र आता है. अगर इतिहास को खंगालें तो ऐसा नहीं दिखता है. भगत सिंह की जितनी भी तस्वीरें, उनसे जुड़े जितने भी दस्तावेज उपलब्ध हैं उसमें कहीं पर भी ऐसा नहीं दिखता है कि भगत सिंह ने कभी पीली या बसंती रंग की पगड़ी बांधी हो.
1929 में The Tribune में छपी भगत सिंह की तस्वीर (साभार: प्रो. चमनलाल)
क्या कहते हैं भगत सिंह से जुड़े हुए दस्तावेज?
शहीद-ए-आजम भगत सिंह से जुड़ी कई किताबें लिख चुके और उनके दस्तावजों पर अध्ययन कर चुके जेएनयू के प्रोफेसर चमनलाल का भी यही मानना है. प्रोफेसर चमनलाल ने बताया, ‘दस्तावेजों के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि भगत सिंह का पीली पगड़ी के साथ किसी भी तरह का कनेक्शन नहीं है, जो भी दावे किए जाते हैं वह पूरी तरह से गलत ही हैं’.
चमनलाल के मुताबिक, ‘भगत सिंह की सिर्फ चार ही तस्वीरें उपलब्ध हैं, जिसमें वह उम्र के अलग-अलग पड़ाव में दिखे हैं. चारों ही तस्वीरों में किसी में भी पीली पगड़ी नज़र नहीं आती है. साल 1929 में द ट्रिब्यून ने भी अपने फ्रंट पेज पर एक भगत सिंह की तस्वीर छापी थी, जिसमें वह सफेद पगड़ी बांधे हुए थे.’.
भगत सिंह की उपलब्ध चार तस्वीरें (साभार: प्रो. चमनलाल)
भगत सिंह के परिवार ने भी उठाए सवाल
सिर्फ इतिहासकर्ता ही नहीं बल्कि भगत सिंह के परिवार से जुड़े लोग भी इसपर आपत्ति जाहिर करते हैं. दरअसल, भगवंत मान ने मुख्यमंत्री बनने के बाद ऐलान किया कि पंजाब के सरकारी दफ्तरों में अब सरदार भगत सिंह और बाबा साहेब अंबेडकर की तस्वीर लगाई जाएगी. यहां जो तस्वीर लगी है, उसमें भगत सिंह पीली पगड़ी बांधे ही नज़र आए हैं.
भगत सिंह के भतीजे और वीर चक्र विजेता शेहोनान सिंह ने सोशल मीडिया पर अपने एक पोस्ट में इस बात का जिक्र किया है. शेहोनान सिंह का कहना है कि वह अपनी ओर से पंजाब सरकार को भगत सिंह की असली तस्वीर भेंट देने गए थे, जिसमें वह सफेद पगड़ी में दिखाई पड़ रहे हैं. लेकिन उनसे किसी ने मुलाकात नहीं की, साथ ही मुख्यमंत्री आवास में जो तस्वीर लगी है वह असली ना होकर पेंटिंग के आधार पर बनी हुई है.
दरअसल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के दफ्तर में भगत सिंह की पीली पगड़ी की तस्वीर लगने का ही विवाद नहीं है. बल्कि महात्मा गांधी और महाराजा रणजीत सिंह की तस्वीर हटाए जाने को लेकर भी आपत्ति जताई गई है.
आपको बता दें कि 23 मार्च को ही शहीद दिवस भी मनाया जा रहा है. 23 मार्च 1931 को ही भगत सिंह को 24 साल की उम्र में लाहौर की सेंट्रल जेल में फांसी दी गई थी.