छत्तीसगढ़:– कक्षा 1 में दाखिले की प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मामले में संज्ञान लिया. छुट्टी के दिन विशेष सुनवाई की और राज्य सरकार से एक हलफनामा तलब किया है. इस मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को होगी.
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत कक्षा 1 में दाखिले की प्रक्रिया में सामने आई गंभीर लापरवाही को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. एक विशेष रिपोर्ट के आधार पर मामले में संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने सुनवाई शुरू की. हालात की गंभीरता को देखते हुए, कोर्ट ने छुट्टी के दिन भी एक विशेष सुनवाई की. सुनवाई के दौरान शुरुआती चरण में ही प्रक्रिया से जुड़ी कई खामियां सामने आईं. इस मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार से हलफनामा मांगा है.
हाई कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि RTE अधिनियम के तहत दाखिले की प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि पूरी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ और तय नियमों का सख्ती से पालन करते हुए संपन्न हो.
कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा हलफनामा
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रक्रिया में हो रही देरी पर नाराजगी जताई. उन्होंने राज्य सरकार से हलफनामा मांगा है. 8 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी. 38 हजार में से 16 हजार से अधिक आवेदन अब भी लंबित है. शिक्षा का अधिकार (RTE) मामले में सुनवाई में सामने आया कि, कुल 38,438 आवेदनों में से केवल 23,766 का ही सत्यापन हो पाया है, जबकि 16 हजार से अधिक आवेदन अब भी लंबित हैं. कई जिलों में सत्यापन की स्थिति बेहद खराब है. कोर्ट ने माना कि नोडल प्राचार्यों की धीमी कार्यप्रणाली के कारण पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. कोर्ट ने कहा कि 13 से 17 अप्रैल के बीच प्रस्तावित स्कूल आवंटन की लॉटरी प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है. इससे अभिभावकों को अनावश्यक परेशानी होगी. कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत हलफनामा मांगा है और अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को होगी.
