नई दिल्ली:– भारत में कई ऐसे प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, जो आज भी अपने रहस्यों और चमत्कारों के कारण लोगों को हैरान करते हैं। कहीं कपाट बंद होने के बाद मंदिर की ओर देखने तक की मनाही है, तो कहीं ऐसी मान्यता है कि द्वार बंद होते ही भगवान स्वयं प्रकट होते हैं। इन्हीं रहस्यमयी मंदिरों की सूची में तेलंगाना का छाया सोमेश्वर मंदिर भी शामिल है, जहां भगवान शिव के ठीक पीछे दीवार पर मनुष्य की आकृति जैसी एक रहस्यमयी परछाई दिखाई देती है। यह परछाई आखिर किसकी है और कैसे बनती है, यह सवाल आज भी लोगों के बीच रहस्य बना हुआ है।
रहस्यों से घिरा छाया सोमेश्वर मंदिर
तेलंगाना के नालगोंडा जिले के पनागल गांव में स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यहां श्रद्धालु केवल शिवलिंग के दर्शन के लिए ही नहीं, बल्कि गर्भगृह में दिखाई देने वाली अद्भुत परछाई को देखने के लिए भी दूर-दूर से आते हैं। यह रहस्यमयी छाया न सिर्फ भक्तों, बल्कि वैज्ञानिकों और वास्तुकला विशेषज्ञों को भी आकर्षित करती है। इसे लगभग 1000 साल पुरानी उन्नत वास्तुकला और वैज्ञानिक समझ का जीवंत उदाहरण माना जाता है।
शिवलिंग के पीछे मनुष्य जैसी परछाई
मंदिर के गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग के पीछे दीवार पर एक मानव आकृति जैसी छाया साफ दिखाई देती है। हैरानी की बात यह है कि यह परछाई कभी हिलती नहीं, न ही इसके आकार में कोई बदलाव होता है। सबसे बड़ा रहस्य यह है कि गर्भगृह में ऐसी कोई वस्तु मौजूद नहीं है, जो इस परछाई को बना सके। माना जाता है कि यह प्रकाश और कोण के मेल से बना एक अद्भुत आर्किटेक्चरल भ्रम है।
मंदिर का अनोखा डिजाइन
वैज्ञानिकों के अनुसार, गर्भगृह के सामने लगे कई स्तंभों के कारण पूरे दिन सूर्य का प्रकाश मंदिर के भीतर बना रहता है। यही रोशनी मंदिर के हर हिस्से तक पहुंचती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि शिवलिंग के पीछे दिखने वाली मानव आकृति कई स्तंभों की संयुक्त छाया से बनती है, हालांकि इसकी अब तक कोई ठोस पुष्टि नहीं हो सकी है।
इतिहास, आस्था और पौराणिक मान्यताएं
छाया सोमेश्वर मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में इक्ष्वाकु वंश के कुंदुरु चोडा शासकों द्वारा कराया गया था। मंदिर परिसर में भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु और सूर्य की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। इसका गोपुरम भी बेहद खास है, जहां आठ दिशाओं के देवताओं और भगवान शिव को नटराज मुद्रा में उकेरा गया है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस स्थान पर भगवान चंद्र ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए थे। मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्राप्त होती है। छाया सोमेश्वर मंदिर आज भी आस्था और विज्ञान के अद्भुत संगम का प्रतीक बना हुआ है।
