
रायपुर, नितिन नामदेव : राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती में जैतूसाव मठ के समीप हनुमान मंदिर में एक बावली है, जो लगभग 400 साल पुरानी है. इतिहासकारो का कहना है कि पुराने शहर की अनेक बावली में से कुछ ही बावली बची है, उनमें से एक पुरानी बस्ती में है,वही मंदिर के पुजारी मनोज पाठक ने TCP 24 से खास-बातचीत करते हुए बताया कि ग्रामीणों को बावली के भीतर से भगवान हनुमान जी की प्रतिमा प्राप्त हुई थी,बावली के बगल में श्रीराम भक्त हनुमान का विशाल मंदिर है जिसे बावली वाले हनुमान मंदिर के नाम से ही जाना जाता है, आज ये प्रतिमाए राजधानी के बावली मंदिर, दूधाधारी मठ और गुढ़ियारी मच्छी तालाब स्थित हनुमान मंदिर में ये प्रतिमाए स्थापित है।

400 साल पहले की है यह बावली
मंदिर पुजारी ने मनोज पाठक ने बताया की पहले इसी बावली से हनुमानजी की तीन मूर्तियां प्रकट हुई थी, जिसे शहर के तीन स्थानों में प्रतिष्ठापित किया गया। आज 400 साल बाद भी तीनों मंदिर भक्तों की .आस्था के केंद्र बने हुए है।मंदिर के पुजारी मोहन पाठक बताते हैं, बावली से हनुमानजी की चार प्रतिमाएं प्रकट हुई थीं, लेकिन इसमें एक प्रतिमा बावली के भीतर ही रह गई। जबकि तीन प्रतिमाओं को बाहर निकालकर बावली से कुछ दूर ही मंदिर बनाकर प्रतिष्ठापित की गई।
जबकि दूसरी प्रतिमा दूधाधारी मंदिर और तीसरी गुढ़ियारी के मच्छीतालाब में स्थापित की गई। यह किवदंती है कि तीनों ही प्रतिमाओं को स्थापित करने की दिशा भी हनुमानजी ने एक संत को सपने में बताई थी। उनके बताए स्थान और दिशा में ही मूर्तियां स्थापित की गई और आज भी संकटमोचन के भक्त तीनों मंदिरों में प्रभु की कृपा का साक्षात अनुभव करते हैं मंदिर में हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है.
हर साल बढ़ रही प्रतिमा
बावली से निकली दूसरी प्रतिमा को मठपारा इलाके में ऐतिहासिक दूधाधारी मंदिर में स्थापित किया गया है। यहां मन्नत मांगने भक्त मंदिर के चारों ओर नारियल बांधते हैं। पिछले कई सालों से यहां हजारों नारियल बंधे हुए हैं। जब भक्तों की मनोकामना पूरी होती है तो वे बंधा हुआ नारियल उतारकर नदी में प्रवाहित करते हैं। बावली से निकली तीसरी प्रतिमा गुढ़यिारी के मच्छी तालाब के किनारे स्थापित की गई। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि (भगवान की प्रतिमा हर साल बढ़ती है। तालाब के पानी से भगवान का अभिषेक किया जाता है। मंदिर की सफाई में भी तालाब का पानी इस्तेमाल होता है।
हनुमानजी ने ऐसे हुए प्रकट
बावली से तीन प्रतिमाओं को बाहर निकाला गया। एक प्रतिमा छोटे मंदिर में स्थापित की गई। फिर संत के बताए अनुसार बाकी दो प्रतिमाओं में से एक को दूधाधारी मंदिर और दूसरी को मच्छीतालाब गुढ़ियारी में स्थापित की गई।
भीषण गर्मी में भी नही सूखती बावली
बावली में कई कछुए हैं। इस वजह से बावली का पानी प्रदूषित नहीं होता। पानी इतना साफ होता है कि इसे छाने बगैर ही पीया भी जा सकता है।