नई दिल्ली:– हम में से लगभग हर व्यक्ति ने गौर किया होगा कि जब हम ज्यादा देर तक पानी में रहते हैं, नहाते हैं या स्विमिंग करते हैं तो हमारे हाथों और पैरों की उंगलियां किसी बूढ़े व्यक्ति की तरह सिकुड़ जाती हैं। अक्सर हम इसे एक सामान्य प्रक्रिया मानकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन विज्ञान की दुनिया में यह आपके शरीर की सबसे अद्भुत सुपरपावर में से एक मानी जाती है।
क्यों सिकुड़ जाती हैं उंगलियां
लंबे समय तक वैज्ञानिकों का मानना था कि पानी त्वचा के अंदर चला जाता है जिससे उंगलियां फूलकर सिकुड़ जाती हैं। लेकिन 1930 के दशक में हुए एक शोध ने सबको चौंका दिया। वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन लोगों की तंत्रिकाएं (Nerves) क्षतिग्रस्त हो गई थीं उनकी उंगलियां पानी में नहीं सिकुड़ती थीं। इससे यह साबित हो गया कि यह त्वचा की कोई कमजोरी नहीं बल्कि हमारे ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम (Autonomic Nervous System) की एक सोची-समझी प्रतिक्रिया है।
दिमाग भेजता है संकेत
आमतौर पर माना जाता है कि पानी सोखने की वजह से त्वचा फूल जाती है लेकिन वैज्ञानिक रिसर्च इस धारणा को सिरे से खारिज करती है। असल में यह एक न्यूरोलॉजिकल रिएक्शन है। जैसे ही उंगलियां पानी में ज्यादा देर तक रहती हैं वहां मौजूद नसें सक्रिय होकर दिमाग को संकेत भेजती हैं। इसके जवाब में हमारा दिमाग उंगलियों की रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ने का आदेश देता है। जब उंगलियों में रक्त का प्रवाह कम होता है तो त्वचा अंदर की ओर खिंच जाती है और झुर्रियां बन जाती हैं।
डॉक्टरों का मानना है कि पानी में उंगलियों का सिकुड़ना पूरी तरह से सामान्य और स्वस्थ होने का संकेत है। यह दर्शाता है कि आपका नर्वस सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जिन लोगों की नसों में गंभीर नुकसान होता है उनकी उंगलियां पानी में भी नहीं सिकुड़तीं। यानी ये झुर्रियां आपके शरीर के हेल्दी होने का एक अनूठा सर्टिफिकेट हैं।
उंगलियां सिकुड़ना है फायदेमंद
वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके पीछे एक बड़ा फायदा छिपा है। सिकुड़ी हुई उंगलियों से गीली चीजों को पकड़ना आसान हो जाता है। ये झुर्रियां बिल्कुल वैसे ही काम करती हैं जैसे गाड़ी के टायरों में बने खांचे गीली सड़क पर बेहतर पकड़ बनाते हैं। यह झुर्रियां पानी को बाहर निकाल देती हैं जिससे इंसान की ग्रिप मजबूत हो जाती है।
अगर काफी देर पानी में रहने के बाद भी उंगलियां बिल्कुल नहीं सिकुड़ती तो यह नसों से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है। हालांकि सामान्य तौर पर यह प्रक्रिया पानी से बाहर आने के कुछ समय बाद खुद-ब-खुद ठीक हो जाती है और इसमें किसी इलाज की जरूरत नहीं होती।
