नई दिल्ली:– शादी की तैयारियां केवल कपड़ों और गहनों तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि इसकी शुरुआत उस एक ‘पीले कार्ड’ से होती है जो आपके नए जीवन का संदेश वाहक बनता है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि विवाह पत्रिका (Wedding Card) केवल एक निमंत्रण नहीं, बल्कि एक सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है। यदि इसे वास्तु के अनुरूप बनाया जाए, तो यह न केवल विवाह निर्विघ्न संपन्न कराता है, बल्कि नवदंपति के जीवन में खुशहाली भी लाता है।
आइए जानते हैं कि शादी का कार्ड बनवाते समय किन विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:
- रंगों का जादू: जो बढ़ाए प्रेम और सौहार्द
वास्तु शास्त्र में रंगों का अपना मनोविज्ञान और प्रभाव होता है। शादी के कार्ड के लिए लाल, पीला, केसरिया और क्रीम (Off-white) रंग सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं।
लाल रंग: यह मंगल और प्रेम का प्रतीक है, जो वैवाहिक जीवन में ऊर्जा भरता है।
पीला रंग: यह गुरु ग्रह का प्रतीक है, जो शुभता और ज्ञान लाता है।
परहेज करें: काले, गहरे नीले या स्लेटी (Grey) रंगों से बचें। ये रंग शोक या नकारात्मकता को दर्शाते हैं और मांगलिक कार्यों में वर्जित माने जाते हैं।
- मांगलिक चिन्ह: सुख-समृद्धि का द्वार
कार्ड पर सही प्रतीकों का होना घर में बरकत लाता है।
गणेश जी: प्रथम पूज्य गणेश जी की तस्वीर बाधाओं को दूर करती है।
स्वास्तिक और कलश: ये चिन्ह वातावरण में सकारात्मकता फैलाते हैं।
सावधानी: आजकल ‘मिनिमलिस्ट’ डिजाइन के नाम पर लोग इन प्रतीकों को हटा देते हैं, जो वास्तु के नजरिए से सही नहीं है।
- आकार और किनारों का रखें ध्यान
शायद ही आपको पता हो, लेकिन कार्ड के कोने (Edges) भी आपके भाग्य पर असर डालते हैं।
वास्तु के अनुसार, कार्ड के किनारे बहुत ज्यादा नुकीले या कटी-फटी आकृतियों वाले नहीं होने चाहिए।
समान चौकोर या आयताकार कार्ड जिसमें किनारे थोड़े मुड़े हुए या गोल हों, वे संबंधों में मधुरता लाते हैं।
- शब्दों की मर्यादा और स्पष्टता
कार्ड पर लिखे शब्दों का प्रभाव सीधे मेहमानों की मानसिकता पर पड़ता है।
स्पष्ट विवरण: शुभ मुहूर्त, तिथि और नक्षत्र का स्पष्ट उल्लेख करें।
सौम्य भाषा: शब्दों का चयन बहुत ही शालीन और सम्मानजनक होना चाहिए। शब्दों में भारीपन या कठोरता नहीं होनी चाहिए।
- पहला कार्ड किसे दें?
वास्तु और सनातन परंपरा के अनुसार, कार्ड छपकर आने के बाद सबसे पहली प्रति अपने कुलदेवता या भगवान गणेश को अर्पित करें। ऐसा करने से अदृश्य बाधाएं दूर होती हैं। इसके बाद ही परिवार के बड़ों और सगे-संबंधियों को न्योता दें।
