नई दिल्ली:– ज्योतिष शास्त्र में 84 उपरत्न और प्रमुख 5 रत्नों का जिक्र मिलता है। रत्न किसी न किसी ग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन्हीं में से एक है नीलम रत्न। नीलम रत्न का संबंध शनि देव से है। शनि देव को न्याय का देवता भी कहा जाता है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति नीलम रत्न पहनता है, उसको सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। लेकिन हर रत्न हर व्यक्ति के लिए शुभ नहीं होता। अगर बिना सोच-समझे कोई रत्न पहन लिया जाए, तो उसका उल्टा असर भी हो सकता है। इसलिए किसी भी रत्न को धारण करने से पहले ज्योतिषीय सलाह लेना बेहद जरूरी है। चलिए जानते हैं कि नीलम रत्न पहनने के क्या फायदे हैं।
कौन पहन सकता है
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि देव उच्च के विराजमान हैं तो वह नीलम पहन सकता है। वहीं नीलम रत्न कुंभ और मकर राशि के लोग पहन सकते हैं, क्योंकि इन राशियों पर शनि देव का ही आधिपत्य है। इसके अलावा वृष, मिथुन, कन्या, तुला राशि के लोग भी नीलम कुंडली दिखाकर पहन सकते हैं। मान्यता है कि कुंडली में चौथे, पांचवे, दसवें और ग्यारहवें भाव में शनि हो तो नीलम पहनने से बहुत लाभ मिलता है। जब शनि छठें और आठवें भाव के स्वामी के साथ बैठा हो या वे खुद ही छठे और आठवें भाव में विराजमान हो तो भी नीलम रत्न धारण करना चाहिए।
इस विधि से करें नीलम धारण
- नीलम रत्न को पहनने से पहले उसे गंगाजल औऱ कच्चे दूध से शुद्ध करके पहनना चाहिए।
- नीलम रत्न सवा 7 से सवा 8 रत्ती का खरीदकर लाना चाहिए।
- नीलम रत्न पंचधातु या चांदी में पहनना शुभ रहता है।
नीलम को मध्यमा ऊंगली में धारण कर सकते हैं। शनिवार नीलम पहनना लाभप्रद रहता है। - नीलम पहने के बाद मांस और मदिरा का सेवन भूलकर भी न करें।
नीलम पहनने से मिलते हैं ये लाभ
- नीलम धारण करने से व्यक्ति को करियर और कारोबार में अच्छी तरक्की मिलती है।
नीलम पहनने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है। - साथ ही जिन लोगों को रात में नींद नहीं आती है, वो लोग भी नीलम धारण कर सकते हैं।
- नीलम रत्न पहनने से मानसिक शांति मिलती है और तनाव कम होता है।
- नीलम शनि की साढ़ेसाती का दुष्प्रभाव दूर करता है।
