मुंबई, 13 फरवरी । वैश्विक बाजर की गिरावट के दबाव में बीते सप्ताह लगभग प्रतिशत गिर चुके घरेलू शेयर बाजार की चाल अगले सप्ताह रूस-यूक्रेन तनाव, इसके अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख, पांच राज्यों में हो रहे चुनाव एवं जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के जारी होने वाले प्रारंभिक सार्वजनिक निगम (आईपीओ) से तय होगी।
बीते सप्ताह बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 491.9 अंक टूटकर 58152.92 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 141.55 अंक गिरकर 17374.75 अंक पर आ गया। दिग्गज कंपनियों की तरह छाेटी और मझौली कंपनियों ने भी बिकवाली की मार झेली। सप्ताहांत पर बीएसई का मिडकैप 499.69 अंक उतरकर 24250.92 अंक और स्मॉलकैप 1010.76 अंक लुढ़ककर 28691.82 अंक पर रहा।
विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक बाजार रिकॉर्ड मुद्रास्फीति के बाद अमेरिका में ब्याज दरों में तेज वृद्धि की आशंकाओं के साथ समायोजित हो रहा है लेकिन बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों की निवेश धारणा को और खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। रूस-यूक्रेन गतिरोध पर कुछ खबरों के बाद शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में तेज बिकवाली का दबाव देखा गया। इस तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई, जो भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए अच्छा नहीं है।
स्थानीय स्तर पर अगले सप्ताह मुद्रास्फीति के आंकड़े होंगे जबकि कंपनियों के तिमाही परिणाम सत्र के अंत में कुछ व्यक्तिगत शेयरों पर असर पड़ेगा। राजनीतिक मोर्चे पर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर के आगामी विधानसभा चुनाव की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर रहेगी। साथ ही
एलआईसी का आईपीओ बाजार के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारतीय बाजार के इतिहास में सबसे बड़ा आईपीओ होने जा रहा है। इस आईपीओ के जल्द ही बाजार में आने की उम्मीद है, जिसासे कम से कम एक करोड़ नए डीमैट खाते खुल सकते हैं और यह भारतीय बाजार की गतिशीलता के लिए एक बड़ा सकारात्मक हो सकता है क्योंकि यदि इनमें से 10 प्रतिशत निवेशक सक्रिय हो जाते हैं तो यह खुदरा निवेशकों की भागीदारी में वृद्धि करेगा और यह सरकार को एसटीटी के माध्यम से राजस्व उत्पन्न करने में भी मददगार साबित होगा।
अगले सप्ताह शेयर बाजार की चाल को निर्धारित करने में एफआईआई का व्यवहार भी एक महत्वपूर्ण कारक होगा क्योंकि वे लगातार बिकवाली कर रहे हैं। मौजूदा बाजार के बारे में दिलचस्प बात यह है कि इसमें काफी उतार-चढ़ाव रहा है लेकिन एफआईआई द्वारा 1.5 लाख करोड़ से अधिक की बिकवाली के बावजूद अक्टूबर के बाद से बाजार एक रेंज में गतिशील है।