वाराणसी:- महादेव की नगरी काशी को परंपराओं का शहर कहते हैं. इस शहर में कई ऐसी परंपराएं होती हैं, जो दुनिया में कहीं और नहीं देखने को मिलती हैं. ऐसी ही एक अनोखी परम्परा है काशी के महाश्मशान घाट पर जलती चिताओं के बीच नगरवधुओं का नृत्य. जिसका इतिहास करीब 400 सालों से अधिक पुराना है. लोक मान्यता है कि जो नगर वधु मसान नाथ बाबा के इस उत्सव में हाजिरी लगाती हैं और महाश्मशान घाट पर नृत्य करती हैं, उन्हें अगले जन्म में इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिल जाती है.
यही वजह है कि वाराणसी और आस-पास के जिलों की नगर वधुएं नवरात्रि के सप्तमी तिथि को यहां हाजिरी लगाती हैं. जलती चिताओं के बीच नृत्य करती हैं. गीत, संगीत और घुंघरुओं की आवाज का ऐसा अद्भुत संगम सिर्फ काशी में देखने को मिलता है.
राजा मान सिंह के समय से चली आ रही परंपरा
नगर वधुओं के इस नृत्य के आयोजन के पहले मसान नाथ बाबा का श्रृंगार होता है और फिर तंत्र विधि से उनकी पूजा होती है. आयोजक गुलशन कपूर ने बताया कि राजा मान सिंह के समय से नगर वधुओं के नृत्य की यह परंपरा चली आ रही है.
1585 में पहली बार हुआ था आयोजन
उन्होंने बताया कि 1585 में राजा मान सिंह ने महाश्मशान घाट पर बाबा मसाननाथ का मंदिर बनवाया था. जिसके बाद उन्होंने यहां प्राण प्रतिष्ठा आयोजन में देशभर के नामचीन संगीतकारों को न्योता भेजा. लेकिन तब महाश्मशान होने के कारण कोई यहां नहीं आया. जिसके बाद राजा मानसिंह ने नगर वधुओं को इसके लिए आमंत्रित किया.
