नई दिल्ली:– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के बीच दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता ने भारत-UAE संबंधों को एक नई रणनीतिक ऊँचाई पर पहुँचा दिया है। महज तीन घंटे की इस संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली मुलाकात में दोनों देशों के बीच रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा, निवेश, खाद्य सुरक्षा और आतंकवाद विरोध जैसे अहम क्षेत्रों में बड़े फैसले लिए गए। विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, यह दौरा “छोटा लेकिन अत्यंत ठोस और परिणामोन्मुखी” रहा, जिसमें 5 महत्वपूर्ण समझौते और 7 बड़े ऐलान किए गए।
रक्षा, अंतरिक्ष और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती:
भारत और UAE ने सामरिक रक्षा साझेदारी के लिए फ्रेमवर्क समझौते पर काम शुरू करने के उद्देश्य से Letter of Intent पर हस्ताक्षर किए। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा उत्पादन, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग को नई दिशा मिलेगी। अंतरिक्ष क्षेत्र में भी ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। दोनों देश दो लॉन्च सुविधाओं, सैटेलाइट निर्माण और स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में साझेदारी करेंगे, जिससे भारत की स्पेस कैपेबिलिटी को वैश्विक समर्थन मिलेगा।
ऊर्जा सुरक्षा में UAE बना भारत का बड़ा साझेदार:
ऊर्जा क्षेत्र में भारत को बड़ी राहत मिली है। UAE अब भारत को हर साल 0.5 मिलियन मीट्रिक टन LNG की आपूर्ति करेगा। इसके साथ ही UAE, भारत का दूसरा सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता बन गया है। यह समझौता भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इसके अलावा, नागरिक परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को भी दोनों देशों ने टटोलने का निर्णय लिया है।
निवेश, डेटा सेंटर और AI पर फोकस:
UAE, भारत में गुजरात के धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन के विकास में भागीदारी करेगा। साथ ही, डेटा सेंटर क्षमता, सुपर कंप्यूटिंग क्लस्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भविष्य के प्रमुख सहयोग क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। दोनों देशों ने ‘डेटा एंबेसी’ की अवधारणा पर भी विचार करने पर सहमति जताई, जो डिजिटल संप्रभुता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
फूड सिक्योरिटी से किसानों को लाभ:
खाद्य सुरक्षा पर हुए MoU से एक ओर जहां यूएई की फूड सप्लाई चेन मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर भारतीय किसानों को निर्यात के नए अवसर मिलेंगे। यह साझेदारी भारत के कृषि-आधारित निर्यात को पश्चिम एशिया और अफ्रीका तक विस्तार देने में मदद करेगी।
आतंकवाद पर सख्त रुख, क्षेत्रीय शांति पर सहमति:
दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की और आतंक के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने पर एकजुटता दिखाई। पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा करते हुए शांति, स्थिरता और समृद्धि के समर्थन पर सहमति बनी।
‘हाउस ऑफ इंडिया’ और प्रवासी भारतीयों को सम्मान:
यूएई में रह रहे 45 लाख भारतीयों के सम्मान और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए अबू धाबी में ‘हाउस ऑफ इंडिया’ स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र भारत-UAE की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनेगा। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद की यह मुलाकात साबित करती है कि भारत-UAE संबंध अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि रणनीतिक, तकनीकी और वैश्विक साझेदारी में तब्दील हो चुके हैं। रक्षा से लेकर डेटा और ऊर्जा से लेकर संस्कृति तक यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ता है।
