आलोचना सुनने के लिए दिल को बड़ा करना जरूरी है. लेकिन गलत होने के बाद अपनी बुराइयां या आलोचना सुनना किसी को पसंद नहीं होता. इस वजह के कई बार लोगों के बीच मन-मुटाव हो जाते हैं. कई बात तो ये इतने बढ़ जाते हैं कि लोगों के बीच लड़ाई-झगड़े तक शुरू हो जाते हैं. आलोचनाओं को लोग पर्सनल अटैक की तरह ले लेते हैं. लेकिन कोई इंसान आपकी आलोचना क्यों कर रहा है, इसके पीछे का मकसद समझना जरूरी होगा.दिल्ली की जानीृ-मानी साइकोलॉजिस्ट डॉ. दामिनी ग्रोवर का कहना है कि जब तक हम आलोचनाओं के पीछे की वजहों को नहीं समझेंगे, हम लोगों को दोष देते रहे हैं.
इसके साथ ही, आपकी आलोचना किस इंसान की ओर से की जा रही है, इसके बारे भी समझना जरूरी है. जब आप इस पर गौर करेंगे तो किसी भी चीज़ का बुरा नहीं लगेगा. आइए माइंड कोच और साइकोलॉजिस्ट डॉ. दामिनी से जानते हैं कि आलोचनाओं को कैसे हैंडल करें.शांत व्यवहारआलोचनाओं के दौरान जाहिर सी बात है कि गुस्सा आ सकता है. लेकिन इस स्थिती में भी लंबी और गहरी सांस लें. इसके साथ ही, सामने वाले इंसान पर किसी भी तरह का गुस्से वाला रिएक्ट करें. इसके साथ ही, खुद को इमोश्नली तैयार रखें.
हर आलोचना सिखाती हैडॉ. दामिनी कहती हैं कि हर आलोचना आपको कुछ न कुछ सिखाती है. अगर कोई समझदार इंसान आलोचना करता है तो गुस्सा करने की बजाय उनकी बातों को सहजता से स्वीकार करें. आलोचना का मतलब हर बार दिल दुखाना ही नहीं बल्कि गलती के बारे में बताना होता है.सकारात्मक सोचहेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि आलोचनाओं को हमेशा पॉजीटिव सोच से डील करें. ये बात सही है कि आलोचनाएं मन के भाव को बदल देती हैं. लेकिन सामने वाले की बात को समझते हुए कम से कम उस समय तक चीजों को कंट्रोल करके रखें.फीडबैक लेंडॉ. दामिनी कहती हैं कि आलोचनाओं को गलत तरीके से लेने की बजाय आप फीडबैक लें.
