नई दिल्ली:– जहां रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी को रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार्यकर्म के बाद रूसी राष्ट्रपति पुतिन को धन्यवाद करते हुए कहा कि यह 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है।
पीएम मोदी ने कहा कि यह भारत और रूस के बीच सदियों पुरानी मित्रता का प्रतिबिंब है। यह भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त साझेदारी का सम्मान है। पुतिन के नेतृत्व में पिछले 25 वर्षों में भारत और रूस के बीच संबंध मजबूत हुए हैं और हर बार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं।
पीएम मोदी का बयान
सर्वोच्च सम्मान के बाद भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और रूस के लोगों के बेहतर भविष्य की बात करते हुए कहा कि सभी क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करना होगा। आज कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। ऐसे फैसले जिनसे न केवल दोनों देशों बल्कि पूरी दुनिया को फायदा होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत-रूस साझेदारी महत्वपूर्ण है। हमारा मानना है कि शांति और स्थिरता के लिए प्रयास जारी रहने चाहिए। हम इस दिशा में लगातार काम करेंगे
इसके साथ ही पुतिन को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि आपने दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों की जो नींव रखी है, वह समय के साथ और मजबूत और उज्जवल हुई है। लोगों के बीच साझेदारी पर आधारित हमारा आपसी सहयोग हमारे लोगों के बीच भविष्य की उम्मीद और गारंटी बन रहा है।
इन देशों को होने लगा मलाल
भारत और रूस की बढ़ती दोस्ती को देखते हुए कई सारी महाशक्ति देशों को मिर्ची लगने लगी है और रूस के द्वारा भारतीय पीएम को सर्वोच्च सम्मान देने के बाद अमेरिका, चीन और यूक्रेन को सबसे ज्यादा दुख हो रहा है। चीन और यूक्रेन ने तो अपनी बातें सप्षट भी कर दी है। लेकिन सवाल यही खड़ा हो रहा है कि क्या पीएम मोदी के इस सम्मान को लेकर अमेरिका और यूक्रेन भारत से नजरे टेढ़ी करने वाले है।
क्या है रूस का सर्वोच्च सम्मान
अब बात अगर रूस के सर्वोच्च सम्मान की करें तो इसकी स्थापना 1698 में ज़ार पीटर द ग्रेट ने की थी। इसकी स्थापना ईसा मसीह के पहले प्रेषित और रूस के संरक्षक संत सेंट एंड्रयू के सम्मान में की गई थी। यह सम्मान किसी श्रेणी में सबसे उत्कृष्ट नागरिक या सैन्य योग्यता के लिए ही दिया जाता था। इसका इस्तेमाल रूस में सदियों से औपचारिक आयोजनों के लिए किया जाता रहा है।
