रायपुर। इप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणबीर सिंग का निधन। रणबीर सिंग के निधन से देश ने पारसी थियेटर का जानकार और वर्षों पुरानी इस सांस्कृतिक विरासत के पैरोकार को खो दिया है। रणबीर सिंग ने पारसी थियेटर को उसके मौलिक स्वरूप में नाटक करने वालों और दर्शकों के बीच लाने का काम किया। देश विदेश के कई नाटकों का पारसी थियेटर शैली में एडॉप्टेशन कर तथा राष्ट्रीय – अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पारसी थियेटर के विविध वर्णी आयाम को प्रस्तुत कर नौजवानों के बीच इस कला रूप को पूरी ज़िम्मेदारी और गंभीरता से रखा।
उनके असामयिक निधन से सबको आघात लगा है। इप्टा ने अपना नेता और अभिभावक को खो दिया है।नाटकों की प्रस्तुतियों ने बदलाव लाने में महती भूमिका निभाईउन्होंने कहा कि रणबीर सिंग ने कहा था कि नाटक हमारे जीवन और सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख आधार रहा है । आजादी का आन्दोलन हो या या देश और दुनिया में जितनी भी क्रांतियाँ हुई है, उसके पीछे नाटकों की प्रस्तुतियों ने बदलाव लाने में महती भूमिका निभाई है ।नाटक मनुष्य के मस्तिष्क पर सीधा असर करता है । नाटक का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन करना भर नहीं है बल्कि वह समाज की विसंग्गातियों और विद्रूपताओं को सामने रखकर समाज को आइना दिखाता है ।
उन्होंने चिंता जाहिर की कि वर्तमान दौर में नए नाटक नहीं लिखे जा रहे हैं । जनता अच्छे नाटक देखना चाहती है और नाटककारों को जनता के बीच जाने की जरुरत है । आज के चुनौती भरे दौर में नाटककारों और कलाकारों की अहम् भूमिका है जिसे गंभीरता से समझने की जरुरत है। रंगर्मियों को अपनी वर्तमान भूमिका पर चिंतन करने जरुरत है ।पटना इप्टा के सचिव पीयूष सिंह, ऊषा वर्मा, शाकिब, आदि ने भी राष्ट्रीय अध्यक्ष को भाव भीनी श्रद्धांजलि दी।