नई दिल्ली:– मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब खेल जगत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका और इजरायल के साथ जारी टकराव के बीच ईरान ने संकेत दिया है कि वह 2026 फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं लेगा। ईरान के खेल मंत्री ने साफ कहा है कि मौजूदा हालात में खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संभव नहीं है, इसलिए टीम को टूर्नामेंट में भेजना सही नहीं होगा।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में हुए हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में ईरान की सरकार की ओर से यह बड़ा बयान सामने आया है, जिसने खेल जगत में हलचल मचा दी है।
ईरान के खेल मंत्री अहमद दुन्यामाली ने सरकारी टीवी से बातचीत में कहा कि जिस देश ने उनके सर्वोच्च नेता की हत्या की है, वहां जाकर खेलना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात में खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं और ऐसी स्थिति में टीम को विदेश भेजना जोखिम भरा हो सकता है।
दरअसल हाल ही में अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हवाई हमले किए गए थे। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद पूरे मिडिल ईस्ट में हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं और कई जगहों पर संघर्ष की स्थिति बनी हुई है।
ईरान के खेल मंत्री ने कहा कि इन हमलों में हजारों लोगों की जान गई है और देश अभी भी एक कठिन दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में खेल से ज्यादा जरूरी देश की सुरक्षा और स्थिरता है। इसलिए सरकार फिलहाल टीम को वर्ल्ड कप खेलने भेजने के पक्ष में नहीं है।
गौरतलब है कि 2026 फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप का आयोजन अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में होने वाला है। यह टूर्नामेंट 11 जून से 19 जुलाई तक चलेगा और इसमें कुल 48 टीमें हिस्सा लेंगी। यह पहली बार होगा जब वर्ल्ड कप इतने बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा।
पिछले साल हुए ड्रॉ में ईरान को ग्रुप-जी में रखा गया था। इस ग्रुप में बेल्जियम, मिस्र और न्यूजीलैंड जैसी टीमें शामिल हैं। ग्रुप के सभी मुकाबले अमेरिका में खेले जाने तय हुए थे, जिनमें से दो मैच लॉस एंजिलिस और एक मैच सिएटल में होना था।
हालांकि इससे पहले फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो ने कहा था कि उनकी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस मुद्दे पर बातचीत हुई थी। ट्रंप ने भरोसा दिलाया था कि ईरानी टीम का टूर्नामेंट में स्वागत किया जाएगा और खिलाड़ियों को सुरक्षित प्रवेश दिया जाएगा।
इसके बावजूद ईरान की सरकार की ओर से दिए गए बयान ने अब इस बात पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या ईरान वास्तव में टूर्नामेंट में हिस्सा लेगा या नहीं।
अगर ईरान आधिकारिक रूप से वर्ल्ड कप से हटने का फैसला करता है तो इसके कई बड़े असर हो सकते हैं। फीफा के नियमों के अनुसार टूर्नामेंट से हटने वाली टीम पर जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही उसकी जगह किसी दूसरी टीम को मौका दिया जा सकता है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि ईरान अंतिम फैसला क्या लेता है। अगर ईरान वर्ल्ड कप से बाहर होता है तो यह न केवल खेल जगत बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी एक बड़ा संकेत माना जाएगा।
