नई दिल्ली:- ग़ज़ा में जारी युद्ध के कारण अब इसराइल को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.अब तक ग़ज़ा में जारी इसराइली हमलों को अमेरिका का साथ मिलता रहा है.
मगर अब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि ग़ज़ा में जारी अंधाधुंध बमबारी के कारण इसराइल वैश्विक समर्थन खो रहा है.
वहीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में 12 दिसंबर यानी मंगलवार को ग़ज़ा में युद्धविराम को लेकर वोटिंग हुई.
इस वोटिंग में 153 सदस्य देशों ने युद्धविराम के समर्थन और 10 देशों ने ख़िलाफ़ में वोटिंग की. 23 देश वोटिंग से अनुपस्थित रहे.भारत ने भी युद्धविराम के समर्थन में वोटिंग की है.
जब पहली बार संयुक्त राष्ट्र में युद्धविराम को लेकर वोटिंग हुई थी, तब भारत वोटिंग से अनुपस्थित रहा था.
इससे पहले नवंबर में भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में उस प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया था, जिसमें कब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र में इसराइली बस्तियों की निंदा की गई थी.’पूर्वी यरुशलम और सीरियाई गोलान समेत कब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र में इसराइली बस्तियां’ टाइटल से यूएन महासभा में प्रस्ताव पेश किया गया था.
इस प्रस्ताव के समर्थन में 145 वोट पड़े, ख़िलाफ़ में सात और 18 देश वोटिंग से बाहर रहे.26 अक्टूबर को यूएन में इसराइल के गज़ा पर जारी हमले को लेकर आपातकालीन सत्र बुलाया गया था और भारत ने युद्धविराम के प्रस्ताव पर वोट नहीं किया था.
भारत के इस रुख़ को इसराइल के पक्ष में माना गया था. भारत ने तब कहा था कि प्रस्ताव में सात अक्टूबर को इसराइली इलाक़े में हमास के हमले का संदर्भ नहीं था और भारत की नीति आतंकवाद को लेकर ज़ीरो टॉलरेंस की रही है.यूएन में 26 अक्टूबर की वोटिंग के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरब और खाड़ी के देशों के कई नेताओं से बात की थी.
