नई दिल्ली, 11 फरवरी । वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर 9.2 प्रतिशत रहने के अनुमान को दोहराते हुये आज राज्यसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में महंगाई को लक्षित दायरे में रखने की पूरी कोशिश करते हुये काेरोना महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था को दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने में सक्षम बनाया गया है।
श्रीमती सीतारमण ने वित्त वर्ष 2022-23 के आम बजट पर पर सदन में हुयी चर्चा का जबाव देते हुये कहा कि काेरोना महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था को गति देने तथा लोगों को राहत पहुंचाने के लिए वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन पैकेज दिये गये और भारत में भी ऐसा किया गया लेकिन आज अमेरिका में महंगाई 40 वर्ष के उच्चतम स्तर पर है। वर्ष 1992 के बाद जर्मनी में महंगाई रिकार्ड स्तर पर है। यूरो जोन में भी 25 वर्ष में पहली बार महंगाई दिख रही है। ब्रिटेन में भी 30 वर्ष के उच्चतम पर स्तर पर यह पहुंच चुकी है।
उन्होंने इस संबंध में विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाये गये सवालों का जबाव देते हुये कहा कि जनवरी 2012 से अप्रैल 2015 तक 28 महीने लगातार महंगाई नौ फीसदी से ऊपर रही थी लेकिन मोदी सरकार के कार्यकाल में महंगाई को रिजर्व बैंक के लक्षित दायरे छह प्रतिशत के भीतर रखने की पूरी कोशिश की गयी है लेकिन छह बार खुदरा महंगाई ने इस स्तर को पार किया है। पहले महंगाई को मापने का पैमाना थोक मूल्य सूचकांक होता था और यह अभी भी है लेकिन सरकार अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई को अधिक महत्व देती है और इसी का आंकलन किया जा रहा है।
उन्होंने आर्थिक समीक्षा 2021 और अन्य सरकारी संगठनों के अनुमानों का हवाला देते हुये कहा कि चालू वित्त वर्ष में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 9.2 प्रतिशत रहेगी जो दुनिया में सबसे अधिक है। भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना के प्रभावों से निकल चुकी है।
विपक्ष द्वारा उठाये गये विनिवेश के मुद्दों पर उन्होंने कहा कि मल्होत्रा समिति ने वर्ष 1991-92 में बीमा क्षेत्र में निजी और विदेशी निवेश की सिफारिश की थी। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल में 1.07 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश किये गये थे।
किसानों की आय दोगुनी करने के सवालों के जबाव देते हुये वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2013-15 की तुलना में खेती एवं किसानी से जुड़े कार्याें के बजट में छह गुना की बढोतरी हुयी है और वर्ष 2022-23 के बजट में इसके लिए 1.24 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसके साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूँ, धान और तिलहन के साथ ही अन्य अनाजों और कृषि उपज की खरीद भी बढ़ी है।
उन्होंने कोरोना काल में 67 प्रतिशत एमएसएमई के बंद होने का विपक्ष के दावे को स्वीकार करते हुये कहा कि लॉकडाउन के कारण ये उद्यम अस्थायी तौर पर बंद हुये थे लेकिन सरकार के द्वारा दिये गये प्रोत्साहन पैकेज के बल पर इनमें से अधिकांश फिर से शुरू भी हो गये। रोजगार का उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के लिए दिये गये उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं से 60 लाख रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर सृजित करने के उपाय किये गये हैं।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के माध्यम से राज्यों को मदद करने के बारे में उन्होंने कहा कि बजट में राज्यों की मदद के लिए ब्याज मुक्त एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जो 50 वर्षाें के लिए है। इसके साथ ही राज्यों को जीएसटी राजस्व से अलग भी मदद दी जा रही है। राज्यों क्षतिपूर्ति भरपाई के लिए हर महीने के 10 तारीख को 47 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जाती है और नवंबर 2021 तथा जनवरी 2022 में 95- 95 हजार करोड़ रुपये दिये गये हैं।