क्या केजरीवाल इस्तीफा देंगे?कानून के जानकार और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील विनीत जिंदल का दावा है कि कानून के मुताबिक, दोषी ठहराए जाने तक अरविंद केजरीवाल दिल्ली के सीएम पद से इस्तीफा देने के लिए बाध्य नहीं हैं. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951, अयोग्यता प्रावधानों की रूपरेखा देता है, लेकिन पद से हटाने के लिए दोषसिद्धि आवश्यक है. यानी यह साबित करना होगा कि वो दोषी हैं.एलजी की भूमिका के संबंध में, केजरीवाल को सीएम बने रहने के लिए जेल से राहत की आवश्यकता होगी, या एलजी दिल्ली के शासन से को लेकर अनुच्छेद 239 एए के तहत सरकार को निलंबित करने के लिए राष्ट्रपति को शामिल कर सकते हैं.
उपराज्यपाल अनुच्छेद 239एबी के तहत राष्ट्रपति शासन के लिए ‘संवैधानिक मशीनरी की विफलता’ को उचित ठहरा सकते हैं, जिससे संभावित रूप से केजरीवाल को इस्तीफा देना पड़ सकता है और दिल्ली पर केंद्र सरकार के नियंत्रण का निर्देश दिया जा सकता है.जेल से सरकार चला पाना केजरीवाल के लिए कितना मुश्किल होगा?एक मौजूदा सीएम के लिए इस्तीफा एक नैतिक विकल्प हो सकता है. इसके अतिरिक्त, एक मुख्यमंत्री कुछ अनुमतियों के साथ जेल से शासन कर सकता है, जैसे कैबिनेट बैठकें आयोजित करना, जेल मैनुअल के अनुसार और अदालत की मंजूरी के साथ फाइलों पर हस्ताक्षर करना.हालांकि जेल में रहते हुए सरकार चलाना आसान नहीं होगा.
व्यवहारिक तौर पर देखें तो इसमें कई मुश्किल होंगी. वो वीडियो क्रॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कैबिनेट मीटिंग ले सकते हैं, लेकिन इसमें एक अहम भूमिका जेल प्रशासन की होगी. ऐसी मीटिंग के लिए उन्हें जेल प्रशासन की अनुमति लेनी होगी. अगर प्रशासन अनुमति नहीं देता है तो ऐसा संभव नहीं हो पाएगा.क्या लागू होगा राष्ट्रपति शासन?कानून के मुताबिक, अगर कोई सरकारी अधिकारी जेल जाता है तो उसे निलंबित करने का नियम है, लेकिन राजनेताओं के लिए ऐसा कुछ भी स्पष्ट नहीं है. इस तरह अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं तो दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है.राष्ट्रपति शासन लागू कब-कब लागू किया जाता है, अब इसे समझ लेते हैं.
