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    जानिए केरल राज्य का नाम बदलने की क्यों उठी मांग, यह है राज्य का नाम बदलने का पूरा प्रोसेस…….

    By Tv 36 HindustanJune 25, 2024No Comments5 Mins Read
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    केरल विधानसभा ने सोमवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें राज्य का नाम केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने का आग्रह किया है. संविधान में संशोधन करके इस बदलाव को आधिकारिक दर्जा दिया जाएगा. इसके लिए यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है. आइए जानते हैं कि केरल के नाम बदलने की मांग क्यों उठी है और किसी राज्य के नाम बदलने का पूरा प्रोसेस क्या होता है.केरल विधानसभा ने पिछले साल भी राज्य के नाम को बदलने का प्रस्ताव पारित किया था. लेकिन तब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रस्ताव में कुछ तकनीकी बदलावों का सुझाव दिया था. इन सुधारों को ध्यान में रखकर सोमवार को मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन ने विधानसभा में फिर प्रस्ताव पेश किया, जो सर्वसम्मति से पारित भी हो गया

    .क्या है केरल राज्य की मांग?केरल विधानसभा राज्य के नाम को संविधान की पहली अनुसूची में ‘केरलम’ करने की मांग कर रही है. मुख्यमंत्री विजयन ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा,’संविधान की पहली अनुसूची में हमारे राज्य का नाम केरल लिखा हुआ है. ये विधानसभा, केंद्र सरकार से अनुरोध करती है कि वह इसे ‘केरलम’ के रूप में संशोधित करने के लिए तत्काल कदम उठाए.’ संविधान की पहली अनुसूची में भारतीय संघ के घटक राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों का उल्लेख है

    ?केरल विधानसभा से पारित प्रस्ताव में साथ-साथ यह भी मांग की गई है कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ कर दिया जाए. दरअसल, संविधान की आठवीं अनुसूची भारत की भाषाओं से संबंधित है. इसमें वो 22 भारतीय भाषाएं हैं, जिन्हें भारत सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त है. हिंदी और अंग्रेजी के अलावा संविधान इन सभी भाषाओं में भी लिखा हुआ है. केरल राज्य की मांग है उसका नाम इन सभी भाषाओं में केरलम कर दिया जाए.अगस्त 2023 में जो प्रस्ताव पारित हुआ था, उसमें संविधान की पहली और आठवीं अनुसूची दोनों में नाम परिवर्तन की मांग की गई थी. लेकिन केंद्र ने बताया कि सिर्फ पहले शेड्यूल में ही बदलाव की जरूरत है.

    इसलिए, प्रस्ताव को ठीक करने के लिए वापस भेज दिया गया.केरल नाम को ‘केरलम’ क्यों करना चाहती है राज्य सरकार?राज्य के नाम बदलने को लेकर मुख्यमंत्री ने विधानसभा में दलील दी कि राज्य को मलयालम में ‘केरलम’ कहा जाता है और मलयालम भाषी समुदायों के लिए एकीकृत केरल बनाने की मांग राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही जोरदार तरीके से उठती रही है.पिछले साल जब केरल के नाम का मुद्दा उठा था, तब मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘1 नवंबर, 1856 को जब भाषा के आधार पर केरल अलग राज्य तो बना लेकिन इसे केरलम की जगह केरल कहा गया.’बात करें ‘केरलम’ शब्द की तो इसका सबसे पुराना उल्लेख सम्राट अशोक के शिलालेख में मिलता है, जो 257 ईसा पूर्व का है.

    अशोक ने अपने दूतों के जरिए बौद्ध धर्म का प्रचार दूर राज्यों तक किया था. उन्होंने अपने दूसरे शिलालेख में उन देशों का नाम लिखवाया जहां दूत भेजे गए थे. इन देशों में चोल, पांड्य, सत्यपुत्र, केतालपुत्र शामिल थे. विद्वानों का मानना है कि केतालपुत्र का मतलब केरलपुत्र से है, जिसका संस्कृत में मतलब है “केरल का पुत्र”. केरल तब चेरा साम्राज्य का हिस्सा था, जो दक्षिण भारत के इतिहास के तीन सबसे बड़े साम्राज्यों में से एक है.जर्मन विद्वान डॉ. हरमन गुंडर्ट ने 1859 में पहला मलयालम-अंग्रेजी शब्दकोश प्रकाशित किया था. उनका मानना था कि केरलम शब्द चेरम का कन्नड़ रूप है. इसका मतलब उस तटीय जमीन से है जो गोकर्ण (कर्नाटक में) और कन्याकुमारी (तमिलनाडु) के बीच पड़ती है.

    चेरम शब्द की उत्पत्ति संभवतः ‘चेर’ से हो सकती है, जिसका पुरानी तमिल में मलब ‘जोड़ना’ होता है.कैसे बदला जाता है किसी राज्य का नाम?संवैधानिक तौर पर देश की संसद को किसी भी राज्य का नाम बदलने का अधिकार है. संविधान का अनुच्छेद 3 नए राज्यों के गठन और मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन की प्रक्रिया निर्धारित करता है. किसी भी राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया विधानसभा या संसद से शुरू होती है. केरल के मामले में नाम बदलने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया है. अब इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास भेजा गया है. केंद्र अब तय करेगी कि इसे मंजूरी देनी है या नहीं. रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र के निर्देश के पर गृह मंत्रालय, इंटेलिजेंस ब्यूरो, भारतीय सर्वेक्षण, डाक विभाग और रजिस्ट्रार जनरल समेत कई एजेंसियों से एनओसी मिलनी अनिवार्य होगी

    .अगर केंद्र मंजूरी नहीं देती तो प्रक्रिया यहीं रुक जाती है. अगर केंद्र सरकार नाम बदलने पर मुहर लगाती है तो मामला संसद में जाएगा. यहां सरकार को दोनों सदनों में बिल पास कराना होगा. बिल पास होने के बाद, अंतिम मुहर लगने के लिए इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा. राष्ट्रपति के साइन होने के बाद राज्य का नाम बदलने का नोटिफिकेशन जारी होगा.कैसे हुई केरल राज्य की स्थापना?मलयालम भाषी लोगों के लिए अलग राज्य की मांग आजादी के समय से उठ रही थी. उनकी मांग थी त्रावणकोर, कोच्चि और मालाबार को एक कर दिया जाए. लेकिन जब भारत आजाद हुआ, तो त्रावणकोर और कोचीन राज्यों को 1 जुलाई 1949 को त्रावणकोर-कोचीन राज्य बनाने के लिए एक किया गया. जबकि मालाबार मद्रास प्रांत का हिस्सा बना रहा.

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