नई दिल्ली :– 23 जुलाई को भारत की संसद में आम बजट पेश होने वाला है। इस साल पेश होने वाले इस बजट को बही खाता नाम दिया गया है। हालांकि पहले बजट को पेश करने के लिए ब्रीफकेस में लाया जाता था, लेकिन 2019 से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे एक पोटली में लाने की शुरूआत की है, जिसका कवर अक्सर लाल रंग का होता है।
अब बजट को पेश करने से पहले बजट टैब का इस्तेमाल किया जाता है, जिसका कवर लाल रंग का होता है। बजट के डॉक्यूमेंट्स रखने के लिए ब्रीफकेस, बैग, बही खाते और फिर टैब का उपयोग किया जाता है। इस पोटली का विशेष संबंध भारतीय व्यापारियों से है, आइएं जानते है इसमें क्या खास है?
बही खाता
व्यवसाय में किए गए वित्तीय लेन-देन का सटीक रिकॉर्ड रखने, उसे व्यवस्थित करने और बनाए रखने के लिए उपयोग होने वाली प्रक्रिया को बही खाता कहा जाता है। इस बही खाते में लेन-देन में बिक्री, खरीद, व्यय, राजस्व और अन्य वित्तीय गतिविधियां शामिल होती है।
ब्रीफकेस से बहीखाते तक का सफर
2019 से पहले बजट को पेश करने से पहले ब्रीफकेस में रखा जाता था। इस ब्रीफकेस को ग्लैडस्टोन बॉक्स की नकल माना जाता था, जिसमें ब्रिटिश वित्त मंत्री अपना बजट पेश करा करते थे।
भारत ने अपनी भारतीय परंपरा को बढ़ावा देने के लिए ब्रीफकेस में बजट ले जाने वाली इस विदेशी परंपरा का त्याग किया है और अब बजट को एक लाल रंग के कपड़े में कवर करके लेकर आया जाता है। इस लाल रंग के कपड़े पर भारत सरकार का चिन्ह होता है। इस लाल रंग के कपड़े को बजट पोटली और बही खाता कहा जाता है।
दिपावली पर होती है बहीखाते का पूजा
भारत के दक्षिणी हिस्से में दिपावली में होने वाली लक्ष्मी पूजा के दौरान जिस किताब में दिसाब लिखा जाता है, उसे लाल रंग के कपड़े में लपेटकर रखा जाता है। सनातन धर्म में मान्यता है कि घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति के लिए दिपावली के दिन बही खाते की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि दिपावली के दिन बही खाते की पूजा करने से घर के किसी भी प्रकार की कोई दरिद्रता नहीं आती है और इससे घर में मां लक्ष्मी का आर्शीवाद बना रहता है।
भारत के सभी व्यापारी वर्ग के लोग भी दिपावली के दिने विशेष रूप से बही खाते की पूजा करते है। उनकी मान्यता है कि दिपावली का दिने कारोबार के लिए भी नए साल का पहला दिन होता है। बही खाते की इस दिन पूजा करने से व्यवसाय भी अच्छा होता है।
