
चांपा : जांजगीर-चांपा जिला उप मुख्यालय चांपा कोसा कासा कंचन के नाम से विख्यात शहर हसदेव नदी के तट पर बसा हुआ है जो कि पावन पवित्र सलीला के सानिध्य में रहने का वरदान के रूप में देखा जाता है,इसके उपरांत भी 50 वर्षों से भी ज्यादा समय से हसदेव के प्राकृतिक पर्यावरण पर लगातार घात पर प्रतिघात होते रहने के कारणों से आज हसदेव नदी का प्राकृतिक संतुलन खोने से हसदेव परंपरा अब तार तार हो रहा हैजिसे लेकर जागरूक लोगों द्वारा अनेकों बात हसदेव उद्धार के लिए आमूलचूल परिवर्तन का अनेकों प्रयास करने के बाद भी शासन प्रशासन की घोर निद्रा कभी समाप्त नहीं हुई और आज हसदेव के नाम से छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे देश में विख्यात एक अविरल जलधारा जहां एक ओर अर्थविलुप्त होने के कारणों से किसी नाला की भांति बहने को विवश है वहीं इसके प्राकृतिक पर्यावरण में लगातार हो रहे क्षरण ने इस पवित्र नदी है अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है जिसे लेकर अब नए सिरे से हसदेव बचाओ अभियान का एक अनुकरणीय प्रयास किया जा रहा है जिसमें प्रत्येक क्षेत्रवासियों को इस अभियान के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान देना अब अनिवार्य हो रहा है जिसके चलते एक बार पुनः उम्मीद जाग रही है कि अब शासन प्रशासन और जिम्मेदार लोग हसदेव नदी के पुनरुद्धार के लिए सार्थक कदम उठाने के लिए विवश किया जाए इसी के चलते हम अपने चैनल के माध्यम से हसदेव बचाओ अभियान को सपोर्ट करने के लिए अपनी लेखन के माध्यम से आम जनता सहित शासन प्रशासन को जागरूक करने का प्रयास में लगे हुए हैं यदि हम ज्यादा कुछ नहीं कर सके तो हमारा इतना ही प्रयास काफी होगा कि हम हसदेव नदी के तट तक किसी भी प्रकार का गंदगी को फैलाने से यदि बचने का प्रयास करते हैं तो यह हमारे तरफ से एक महत्वपूर्ण योगदान साबित हो सकता है,,,।हसदेव के तट को स्वच्छ बनाने के लिए निर्मित सुलभ शौचालय का कपाट क्यों है बंद,,,,,,?,,,जहां एक ओर राजनीतिक उच्च कक्षाओं के चलते कुछ लोगों ने गोलमेज सम्मेलन कर सिद्ध कर दिया कि अब चांपा खुले में शौच मुक्त शहर बन चुका है और इसे प्रचारित कर उन्होंने स्वच्छ शहर का पुरस्कार भी हासिल कर लिया लेकिन हम ऐसे लोगों के समक्ष यह आवाज बुलंद करना चाहते हैं कि वे आकर हसदो नदी के तट का जायजा लें और तय करें कि यहां लोग खुले में शौच करने के लिए क्यों विवश हो रहे हैं तो इसका एक प्रमुख कारण यह गिनाया जा सकता है लोगों के घरों में शत-प्रतिशत स्वच्छ शौचालय का निर्माण नहीं होने के कारणों से लोग नदी की ओर स्नान ध्यान करने के साथ ही खुले में शौच करने को विवश हो रहे हैं यहां तक कि चांपा के लगभग प्रत्येक वार्डों में स्थान चिन्हित कर सार्वजनिक शौचालय का निर्माण लाखों रुपए खर्च कर कराया जा चुका है लेकिन यह क्षेत्रवासियों के लिए किसी दुर्भाग्य से कम नहीं है कि इन निर्मित शौचालयों में शायद ही कोई शौचालय का कपाट खुला हो जहां लोग खुले में शौच से मुक्ति पाने के लिए सुलभ शौचालय का प्रयोग कर रहे हो ज्यादातर सुलभ शौचालय में देखा जा सकता है।अलीगढ़ का जीनू का जीन वाला ताला,,,,,लटका दिया गया है ऐसी स्थिति में मजबूर एवं सुविधा हीन लोग आखिरकार शौच करने के लिए जाएं तो जाएं कहां ऐसे हालात में लोग नदी किनारे जाकर जहां रोजमर्रा के कार्य के साथ ही खुले में शौच करने को विवश हो रहे हैं,ऐसे हालात में लाखों-करोड़ों से निर्मित सुलभ शौचालय आम जनता को समर्पित कर दिया जाता तो निसंदेह लोग खुले में शौच जाने से अपने आप को बचा पाते और उन्हें इस तरह सरकारी स्तर पर शर्मिंदा होने की नौबत नहीं आती आखिरकार नगर सरकार शासन का लाखों करोड़ों रुपए खर्च करने के उपरांत सुलभ शौचालय को आम जनता के लिए समर्पित क्यों नहीं किया जा रहा यह एक बड़ा प्रश्न क्षेत्रवासियों के लिए परेशानी का वजह बन चुका है ऐसे हालात में हम कैसे स्वच्छ शहर की अवधारणा को मन से स्वीकार कर सकते हैं और हम पावन पवित्र सलीला हसदेव के प्राकृतिक स्वरूप को कैसे स्वच्छ और निर्मल बना सकते हैं जवाब दे स्थानीय सरकार,,,,।