नई दिल्ली:– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फरवरी से दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर इजरायल जाएंगे। लगभग नौ साल बाद हो रही इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे “महत्वपूर्ण और भविष्य निर्धारक” बताते हुए कहा है कि इस दौरे के दौरान हाई-टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष चर्चा होगी।
नेतन्याहू ने साप्ताहिक कैबिनेट बैठक में कहा कि भारत और इजरायल के बीच आर्थिक, राजनयिक और सुरक्षा संबंध लगातार मजबूत हुए हैं और अब तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का समय है। उन्होंने कहा, “हम हाई-टेक, एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी में सहयोग को आगे बढ़ाएंगे। यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देगा।”
तय कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी इजरायल की संसद नेसेट को संबोधित करेंगे। इसके अलावा दोनों नेता याद वाशेम, विश्व होलोकॉस्ट स्मरण केंद्र, भी जाएंगे और यरुशलम में आयोजित एक इनोवेशन इवेंट में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम में तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप सहयोग पर विशेष फोकस रहेगा।
नेतन्याहू ने यह भी संकेत दिया कि भारत और इजरायल मिलकर चरमपंथ के खिलाफ एक मजबूत रणनीतिक समूह बनाने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इजरायल “मिडिल ईस्ट के आसपास और उससे परे गठबंधनों का एक नेटवर्क तैयार करना चाहता है,” जिसमें भारत, ग्रीस, साइप्रस और कुछ अरब, अफ्रीकी तथा एशियाई देश शामिल हो सकते हैं। उनके अनुसार, यह गठजोड़ कट्टरपंथी ताकतों के मुकाबले एक संतुलित और व्यावहारिक धुरी के रूप में काम करेगा।
नेतन्याहू ने कहा, “मकसद ऐसे देशों को एक मंच पर लाना है जो चुनौतियों और लक्ष्यों को समान नजरिए से देखते हों। सहयोग से बेहतर नतीजे मिल सकते हैं और इससे हमारे भविष्य को मजबूती मिलेगी।”
इजरायली प्रधानमंत्री ने भारत की वैश्विक भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने हाल ही में यरुशलम में एक सम्मेलन के दौरान कहा था, “भारत अब छोटा देश नहीं है। वहां 140 करोड़ लोग रहते हैं। भारत शक्तिशाली और लोकप्रिय देश है।”
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी पहली बार 2017 में इजरायल गए थे, जो किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक इजरायल यात्रा थी। उस ऐतिहासिक दौरे ने दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा भरी थी। अब नौ साल बाद होने वाली यह यात्रा तकनीकी, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
