नई दिल्ली:– आज जब पूरे भारत की निगाहें ईरान-इजराइल युद्ध और तेल व गैस के संकट की तरफ जमी हैं, तो एक और खतरा चुपके-चुपके भारत की तरफ बढ़ रहा है. एलपीजी संकट ने सीधे आम आदमी और उद्योगों पर चोट मारी है तो इस नए खतरे ने तेजी से भारत सरकार के खजाने में सेंध लगानी शुरू कर दी है. यह खतरा इसलिए भी और भारी पड़ता जा रहा है, क्योंकि मिडल ईस्ट से तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने के बाद भारत को अन्य देशों से ज्यादा कीमत पर ईंधन खरीदना पड़ रहा है. ऐसे में भारतीय मुद्रा का और कमजोर होना नीम चढ़े करेले जैसा अहसास दे रहा है.
हम बात कर रहे हैं भारतीय मुद्रा यानी रुपये की. दुनियाभर में कारोबार भले ही डॉलर में होता है लेकिन हमें खर्च तो रुपये ही करने पड़ते हैं. शुक्रवार को फॉरेक्स बाजार में रुपया 60 पैसे टूटकर डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 93.49 पर जा पहुंचा है. इसका मतलब है कि देश को इस समय कोई भी सामान खरीदने के लिए पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से अपना खजाना खाली करना पड़ रहा है. ईरान संकट की वजह से डॉलर एक बार फिर लगातार मजबूत हो रहा है और इसका खामियाजा भारत को मोटा आयात बिल चुकाकर भुगतना पड़ रहा.
क्यों टूटता जा रहा रुपया
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने स्थानीय मुद्रा पर और दबाव डाला है. घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक भावनाओं के बावजूद गिरावट थम नहीं पाई. ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों के 180 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के आसार से भी निवेशकों की भावनाओं पर नकारात्मक असर पड़ा है. यह सभी फैक्टर मिलकर सीधे तौर पर भारतीय मुद्रा को कमजोर बना रहे हैं.
रिकॉर्ड गिरावट पर दिख रही भारतीय मुद्रा
शुक्रवार सुबह अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, डॉलर के मुकाबले 92.92 पर खुला. हालांकि, जल्द ही और गिरावट के साथ यह 93 के स्तर से नीचे चला गया. कारोबार के दौरान यह 93.49 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया जो पिछले बंद भाव से 60 पैसे की गिरावट दर्शाता है. रुपया बुधवार को 92.89 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था. विदेशी मुद्रा बाजार गुड़ी पड़वा के मौके पर गुरुवार को बंद थे और आज शुक्रवार को भी दबाव के साथ ही कारोबार शुरू हुआ.
लगातार बढ़ रही डॉलर की मजबूती
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.17 फीसदी की बढ़त के साथ 99.40 पर पहुंच गया है. इसका मतलब है कि डॉलर इस समय फिर से दुनियाभर की अन्य करेंसी के ऊपर बढ़त बनाने में कामयाब रहा है. चूंकि, ग्लोबल मार्केट का ज्यादातर ट्रेड डॉलर में होता है तो मौजूदा हालात में बढ़ती तेल कीमतों और गैस के दाम का फायदा भी डॉलर को ही मिल रहा है. यही वजह है कि रुपया कमजोर हो रहा और सरकारी खजाने पर बोझ भी लगातार बढ़ता जा रहा है.
