नई दिल्ली :- आपको बता दे की प्रयागराज में अब आप संगम के समीप बंधवा बड़े हनुमान मंदिर की आरती में शामिल होना चाहता हैं. तो आपको धोती पहनकर ही आना होगा. मंदिर परिसर में सुबह और शाम की आरती केवल धोती पहनकर आने वाले लोगों को ही शामिल किया जाएगा. वहीं अगर कोई जींस-पैंट पहनकर आता है. तो उसे आरती में शामिल नहीं होने दिया जाएगा.
तर्क के आधार पर मंदिर प्रशासन ने ड्रेस कोड लागू
दरअसल मंदिर में आरती पारंपरिक होने के चलते परिधान का विशेष महत्व होता है. इसी तर्क के आधार पर मंदिर प्रशासन ने ड्रेस कोड लागू किया है. सनातन धर्म के अनुसार पूजा में कमर में धोती और कांधे पर गमछा होना चाहिए. इससे विचार खुले और शुद्ध रहते हैं. इसी कारण पूजा में इस पोशाक को शामिल किया गया है. धोती किसी भी रंग की हो सकती है. मंदिर के आचार्य मंहत के मुताबिक सुबह से शाम तक ड्रेस कोड लागू नहीं कर सकते मगर आरती जैसे खास समय पर लागू किया जा सकता है.
महिलाओं के लिए साड़ी, सलवार सूट अनिवार्य
आगे उन्होंने कहा कि इस दौरान मंदिर का पुजारी ढोल बजाने वाले साधक और आरती में शामिल होने वाले सभी लोगों को इस ड्रेस को पहनन आवश्यक बताया गया है. प्रयागराज में यह व्यवस्था कुछ मंदिरों में पहले ही लागू हो चुकी है. वहीं महिलाओं के लिए साड़ी, सलवार सूट को पहनना अनिवार्य किया गया है.
मनकामेश्वर मंदिर में यह व्यवस्था लागू की गई है. इसके साथ ही जैन मंदिर में भी पारंपरिक परिधान को अनिवार्य किया गया है. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष मंहत रवींद्रपुरी का कहना है कि इस प्रकार का फैसला लिया गया. इससे लोगों के विचार शुद्ध रहते हैं. साथ ही अगर पूजा के वक्त सभी के वस्त्र एक हो तो मंदिर में एकरुपता रहेगी।
