नई दिल्ली:– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर के 1,000 वर्षों के संघर्ष और पुनरुत्थान को याद करते हुए ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का शुभारंभ किया। उन्होंने उन विभूतियों को याद किया जिन्होंने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और मंदिर की सभ्यतागत चेतना को बार-बार जीवित कर राष्ट्र की एकता को सशक्त किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जनवरी 1026 में सोमनाथ पर पहला आक्रमण हुआ था। उन्होंने कहा कि पिछले एक हजार वर्षों में सोमनाथ ने कई हमले झेले, लेकिन ये आक्रमण करोड़ों लोगों की शाश्वत आस्था और उस सभ्यतागत चेतना को कभी नहीं तोड़ सके जिसने इस मंदिर को बार-बार खड़ा किया। इसी गौरवशाली इतिहास और मंदिर के आधुनिक पुनरुद्धार की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 8 से 11 जनवरी तक ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है।
सिद्धांतों से समझौता न करने वालों को नमन
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर भारत माता के उन असंख्य सपूतों को याद किया, जिन्होंने कठिन और भयावह समय में भी अपने मूल्यों और संकल्पों से समझौता नहीं किया। उन्होंने विशेष रूप से सरदार वल्लभ भाई पटेल और के.एम. मुंशी जैसी महान विभूतियों के योगदान का उल्लेख किया, जिनके प्रयासों से 1951 में मंदिर का आधुनिक स्वरूप सामने आया। पीएम ने बताया कि 1951 का वह भव्य उद्घाटन समारोह तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ था।
2001 की यादें और 2026 का संकल्प
पीएम मोदी ने अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वे 31 अक्टूबर 2001 को भी सोमनाथ में आयोजित उस कार्यक्रम का हिस्सा थे, जब मंदिर के पुनर्निर्माण के 50 वर्ष पूरे हुए थे। उस कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी भी शामिल हुए थे। अब वर्ष 2026 में, जब मंदिर के आधुनिक उद्घाटन के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव के समान) पूरे हो रहे हैं, सरकार इसे और भी भव्य तरीके से मना रही है। 11 जनवरी को होने वाले मुख्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री स्वयं भी शामिल होंगे।
भक्तों से तस्वीरों को साझा करने की अपील
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के शुभारंभ पर पीएम मोदी ने अपनी पिछली यात्राओं की कुछ यादगार तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने देश और दुनिया भर के भक्तों से आग्रह किया कि यदि वे कभी सोमनाथ गए हैं, तो अपनी यादों और तस्वीरों को #SomnathSwabhimanParv हैशटैग के साथ सोशल मीडिया पर जरूर साझा करें। उन्होंने कहा कि यह अवसर हमें राष्ट्र की एकता के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा देता है।
