25-26 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा ने भारत-इजरायल संबंधों को एक नए और निर्णायक चरण में पहुंचा दिया है। इजरायल के वित्त मंत्रालय के चीफ इकोनॉमिस्ट श्मूएल अब्रैमजोन के मुताबिक, दोनों देशों के रिश्ते अब प्रतीकात्मक मित्रता से आगे बढ़कर ठोस परिणाम देने वाले दौर में प्रवेश कर चुके हैं। उनके शब्दों में, 2017 की मोदी यात्रा ने जिस विजन की नींव रखी थी, अब वह क्रियान्वयन के चरण में बदल रही है।
अब्रैमजोन ने संकेत दिया कि दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत और इजरायल की टीमें सक्रिय वार्ता में जुटी हैं और प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। इजरायल इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने के लिए उत्सुक है, जिससे यह संभावना मजबूत हो गई है कि साल के अंत तक FTA पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।।
पीएम मोदी की यात्रा साझा महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक
उन्होंने इस यात्रा को स्थिरता, आपसी विश्वास और साझा महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक बताया। साथ ही स्पष्ट किया कि संबंध अब ‘फ्रेंडशिप’ से आगे बढ़कर ‘डिलीवरी’ के स्तर पर पहुंच रहे हैं। इजरायल भारत की आर्थिक शक्ति, तकनीकी क्षमता और वैश्विक प्रभाव को अपनी दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा बनाना चाहता है।
अब्रैमजोन ने कहा, भारत-इजरायल साझेदारी को ‘स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनर’ के स्तर तक ले जाने की दिशा में काम हो रहा है एक ऐसा दर्जा जो अभी तक कुछ चुनिंदा देशों को ही प्राप्त है। इस अपग्रेड से रणनीतिक भरोसा बढ़ेगा, सुरक्षा और रक्षा सहयोग का विस्तार होगा तथा निर्णयों के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा में लाभ
भारत के लिए इस साझेदारी के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं। सबसे पहले, टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में सहयोग को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। इजरायल की हाई-टेक विशेषज्ञता और भारत की बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता मिलकर AI, वॉटर मैनेजमेंट, एग्रीटेक और सेमीकंडक्टर्स जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा करेंगी। रक्षा सहयोग पहले से ही रिश्तों की मजबूत नींव है और भविष्य में रक्षा उत्पादन तथा तकनीकी साझेदारी को और गहराई मिलेगी।
वैश्विक बाजारों में बढ़ा सकती है प्रतिस्पर्धा
इसके अलावा, भारत की मैन्युफैक्चरिंग ताकत और इजरायल की नवाचार क्षमता का संयोजन वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकता है। फिनटेक और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी सहयोग की संभावनाएं प्रबल हैं।
UPI से जुड़ने में इजरायल की रुचि
इजरायल भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था, विशेषकर UPI जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़ने में गंभीर रुचि रखता है और भारत की वित्तीय विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बनना चाहता है। कुल मिलाकर, यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई देने वाली साबित हो सकती है।
