मुंबई:- पता नहीं क्यों बचपन से ही एक ‘सनक’ मुझ पर सवार थी कि शादी करूंगी तो पहले प्यार में डूबूंगी। लेकिन इतना नहीं कि ऊपर तैरकर भी न आ सकूं। पूरी तरह से खुद को डुबा दूं इतनी बेवकूफ मैं नहीं हूं। खूब देख-समझ कर प्यार करूंगी, फिर उसमें थोड़ी डुबकी लगाऊंगी और फिर अगर वह मेरे लिए परफेक्ट हुआ तो ही शादी करूंगी। मेरी इस जिद को घर में सबने सनक का नाम ही दे रखा है। मेरा तलाक हो चुका है। शादी के दो महीने बाद ही मेरी बीवी मुझे छोड़ कर चली गई थी।
उसके अनुसार हमारी जोड़ी परफेक्ट नहीं थी। उसे मुझमें केवल कमियां ही दिखती थीं। मैं उसके लिए परफेक्ट इंसान नहीं था। क्या तुम अब भी मुझसे शादी करना चाहोगी।
मेरे मुंह से शब्द नहीं निकल रहे थे। मैं केवल उसे देख रही थी और सोच रही थी कि आखिर इसकी बीवी को इसमें क्या कम नजर आई। मुझे चुप देख भानु यह सोच चला गया कि शायद मुझे उसके पहले से विवाहित होने पर आपत्ति है। और मैं सोच रही थी कि आखिर यह परफेक्ट नहीं है तो फिर मैं किसके साथ परफेक्ट जोड़ी बनाऊं अपनी।
