नई दिल्ली:– राज्य सरकार द्वारा चार साल पहले लोड फैक्टर में छूट के बाद भी राज्य में स्टील के दाम कम नहीं हुए। पिछले चार साल की अवधि में स्टील के दाम लगभग 56 प्रतिशत तक बढ़ गए। आश्चर्यजनक यह है कि लोड फैक्टर में छूट के लिए पॉवर कंपनियों की तरफ से नियामक आयोग को कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया था।
बताया जा रहा है कि इस पूरी कवायद से स्टील उत्पादकों को तो 750 करोड़ रुपए का अतिरिक्त मुनाफा हुआ, लेकिन आम लोगों को इस छूट का कोई लाभ नहीं मिला। बता दें कि 2018-19 में पूरे देश में 100 मिलियन टन स्टील का उत्पादन हुआ था, उस समय रेट 33,833 रु. प्रति टन था। 2022-23 में रेट बढ़कर 53,036 रु. प्रति टन हो गया।
दरअसल, 2021-22 में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने टैरिफ आदेश जारी किया। इसमें लोड फैक्टर छूट को अधिकतम 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया। स्टील उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की इस नीति के लिए तत्कालीन राज्य सरकार को जिम्मेदार माना जा रहा है। शासन के अधिकृत सूत्रों का दावा है कि इस छूट के कारण स्टील उत्पादकों को मिलने वाली औसत वार्षिक छूट लगभग 300 करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 11 सौ करोड़ रुपए हो गई थी। इन उद्योगों को सालाना लगभग 750 करोड़ रुपए का अतिरिक्त लाभ दिया गया था।
