रायपुर:- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार 8 मार्च को मशहूर बिजनेसमैन और इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति की पत्नी, जानी मानी लेखिका और समाजसेविका सुधा मूर्ति को संसद के उच्च सदन राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है. सुधा मूर्ति ने राज्यसभा नामांकन पर अपनी प्रतिक्रिया भी दी है.
उन्होंने कहा कि कभी भी प्रतिष्ठित पद की मांग नहीं की और इसके बारे में उनको ‘बिल्कुल पता नहीं’ था कि सरकार ने उनको संसद के उच्च सदन के लिए मनोनीत किया है और क्यों किया है.
थाईलैंड के दौरे पर हैं सुधा मूर्ति
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सुधा मूर्ति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से राज्यसभा के लिए उनके नामांकन की घोषणा करना उनके लिए ‘डबल सरप्राइज’ है. उन्होंने कहा कि इस तरह का निर्णय अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर लिया गया है. मैं, इसको लेकर बेहद खुश भी हूं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आभारी हूं. सुधा मूर्ति इन दिनों थाईलैंड के दौरे पर हैं.
मेरे लिए एक एकदम नई फील्ड
सुधा मूर्ति ने कहा कि मुझे यह भी देखना होगा कि किस तरह की चीजें है और मैं क्या कर सकती हूं. यह मेरे लिए एक एकदम नई फील्ड है. इसलिए, मुझे पहले बैठकर स्ट्डी करनी होगी और फिर मैं यह करने में सक्षम हो पाऊंगी. उन्होंने कहा कि उनको इस घोषणा से प्रसन्नता देने वाला आश्चर्य हुआ है.
गरीबों के लिए काम करने को मिल रहा बड़ा मंच
सुधा मूर्ति ने एएनआई को बताया कि मैं खुश हूं. साथ ही मुझे लगता है कि मुझे बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. मैं अपने स्तर पर सर्वश्रेष्ठ काम करने का प्रयास करूंगी. उन्होंने कहा कि मैं व्यक्तिगत स्तर पर खुश हूं कि मुझे गरीब वर्ग के लोगों के लिए काम करने का एक बड़ा मंच मिल रहा है.
दामाद ऋषि सुनक की राजनीति अलग
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सुधा मूर्ति ने राज्यसभा भेजे जाने के फैसले पर यह भी प्रतिक्रिया दी कि वो खुद को राजनेता नहीं मानती हैं. मुझे नहीं लगता कि मैं खुद को एक राजनेता मान कर चलूं. मैं एक राजनेता नहीं हूं. मैं एक मनोनीत राज्यसभा मैंबर हूं. जहां तक मेरे दामाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की राजनीति का सवाल है तो वो उनके देश और उनके लिए अलग है. यहां मेरा काम अलग है. मैं, अब एक ‘गवर्नमेंट वर्कर’ हूं।
