मध्यप्रदेश:– इंदौर में मल-मूत्र से दूषित पेयजल के कारण अब तक 16 लोगों की मौत के बाद हड़कंप की स्थिति है। विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी से होने वाला नुकसान केवल तात्कालिक उल्टी-दस्त तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर समय के साथ गंभीर और दीर्घकालिक रूप ले सकता है।
कैसे शरीर में फैलता है खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित पानी में मौजूद ई-कोलाई, स्यूडोमोनास, साल्मोनेला, प्रोटियस, शिगेला और विब्रियो कालरा जैसे बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर पहले दस्त, उल्टी और डिहाइड्रेशन पैदा करते हैं। बाद में ये किडनी, लिवर, फेफड़ों, आंतों और इम्यून सिस्टम को स्थायी नुकसान पहुंचा सकते हैं। बच्चों में विकास रुक सकता है और बुजुर्गों में अंगों की कार्यक्षमता कमजोर पड़ सकती है।
