नई दिल्ली:– ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। युद्ध को 34 दिन हो चुके हैं और हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश को संबोधित करते हुए सेना की सराहना की और जीत का दावा किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ईरान के कई शीर्ष नेता मारे जा चुके हैं और पिछले एक महीने से जारी इस युद्ध में अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने में लगे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि तेहरान की मिसाइल, ड्रोन और नौसैनिक क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचा है।
ईरान को निर्णायक झटका दिया
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान को निर्णायक झटका दिया है और उनकी सैन्य ताकत को काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका ईरान को परमाणु शक्ति बनने नहीं देगा।
अपने भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और कतर जैसे देशों का समर्थन मिल रहा है और जल्द ही यह अभियान पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि देश में बढ़े ईंधन के दाम अस्थायी हैं और स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी।
ईरान नहीं बना पाएगा परमाणु हथियार
अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य मिडिल ईस्ट के तेल पर नियंत्रण नहीं, बल्कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के मुख्य लक्ष्य थे:
अमेरिका को खतरा पहुंचाने वाली ताकत को समाप्त करना
ईरान की नौसेना और वायुसेना को निष्क्रिय करना
परमाणु हथियार और आतंकवाद को समर्थन देने की क्षमता को खत्म करना
उन्होंने दावा किया कि इन उद्देश्यों को काफी हद तक हासिल कर लिया गया है।
अमेरिका को होर्मुज की जरूरत नहीं
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जो देश होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल आपूर्ति पर निर्भर हैं, उन्हें इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका सहयोग देने को तैयार है, लेकिन नेतृत्व उन देशों को ही करना होगा जो इस तेल पर अत्यधिक निर्भर हैं।
ट्रंप ने सुझाव देते हुए कहा, “पहला, अमेरिका से तेल खरीदें हमारे पास इसकी कोई कमी नहीं है। दूसरा, साहस दिखाएं। यह कदम पहले ही उठाया जाना चाहिए था। जैसा हमने पहले भी कहा, वैसे ही हमारे साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य में जाएं, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करें और अपने हित में उसका उपयोग
