नई दिल्ली:– सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक- साइबर अपराध पर रोक लगाने के लिए दूरसंचार विभाग ने ब्लैकलिस्ट बनाने की शुरुआत कर दी है. इस मामले में सरकार सख्त एक्शन लेने जा रही है. आपको बता दें कि बीते हफ्ते सीएनबीसी आवाज़ ने दो सिम कार्ड को लेकर एक बड़ी जानकारी दी थी. जिस पर फिर मुहर लग गई. अब आपको एक और खबर के बारे में बताते है.
जानकारी के मुताबिक- किसी दूसरे के नाम पर सिम कार्ड लेने वाले या फ्रॉड मैसेज भेजने वाले लोगों पर एक्शन होगा. इन व्यक्तियों पर साइबर सिक्योरिटी को खतरे में डालने वाला माना जाएगा.
इसी के तहत इन सभी को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा. ऐसे में ब्लैकलिस्ट होने वाले व्यक्तियों के सिम कार्ड ब्लॉक हो जाएंगे. साथ ही, 6 महीने से लेकर 3 साल तक के लिए कोई भी कनेक्शन नहीं मिलगेा.
क्या है पूरा मामला-दूरसंचार विभाग ने ब्लैकलिस्ट बनाने की शुरुआत कर दी है. किसी दूसरे के नाम पर सिम कार्ड लेना अपराध है.
किसी भी तरह के फ्रॉड मैसेज भेजना भी अब अपराध की कैटेगिरी में आता है. ऐसे कामों को साइबर सिक्योरिटी को खतरे में डालना माना जाएगा.
इसीलिए 2025 से…नए साल से ब्लैकलिस्ट में अब लोगों के नाम जोड़े जाएंगे. साइबर सिक्योरिटी रूल्स में सरकार ने ये प्रावधान रखा है. रिपोजिटरी ऑफ पर्सन बनाने का प्रस्ताव है.
सरकार पहले व्यक्ति को नोटिस जारी करेगी. व्यक्ति को 7 दिन के अंदर जवाब देना होगा. जनहित में सरकार बिना नोटिस दिए भी कार्रवाई कर सकती है. ऐसे में 6 महीने से लेकर 3 साल तक सरकार ब्लैकलिस्ट में जोड़ सकती है.
नई टेलीकॉम एक्ट में साइबर सिक्योरिटी रूल्स को नोटिफाई किया जा चुका है. यह इसी साल नवंबर में नोटिफाई हुए हैं. इसमें सरकार ने कई नए प्रावधान जोड़े हैं. अब सरकार इसका इस्तेमाल करते हुए एक्शन लेने जा रही है.
