छत्तीसगढ़ :– विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान विकास, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस और भाजपा के विधायकों ने अलग-अलग विषयों पर सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
जांजगीर-चांपा जिले में CSR मद के तहत किए जा रहे खर्च को लेकर कांग्रेस विधायक ब्यास कश्यप ने सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि कलेक्टर द्वारा मनमाने ढंग से कार्यों का वितरण किया जा रहा है। कई ऐसे कार्य हैं, जिनका आवंटन तो कर दिया गया है, लेकिन अब तक जमीन पर काम शुरू नहीं हुआ। वहीं कुछ गांवों के नाम सूची में शामिल ही नहीं हैं, इसके बावजूद वहां कार्य आवंटित दिखाए जा रहे हैं। ब्यास कश्यप ने यह भी सवाल उठाया कि शहरी क्षेत्र में ग्राम पंचायत बनाकर CSR के काम किस आधार पर बांटे गए और क्या इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
इस पर उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने जवाब देते हुए कहा कि CSR मद के लिए कोई अलग समिति गठित नहीं की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्योग स्वयं भी CSR के तहत काम करा सकते हैं और कलेक्टर की अनुशंसा पर भी कार्य स्वीकृत किए जाते हैं। मंत्री ने कहा कि कलेक्टर द्वारा कराए गए कार्यों की जांच संभव है और क्षेत्र की विकास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही काम दिए जाते हैं।
मंत्री के इस जवाब पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब हर मामले में कलेक्टर के पास ही जाना है, तो फिर विधानसभा में सवाल पूछने का क्या औचित्य है। “अगर मंत्री खुद निर्देश नहीं दे सकते, तो सदन की भूमिका क्या रह जाती है,” यह कहते हुए उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने प्रदेश में STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के निर्माण का मुद्दा उठाया। उन्होंने उपमुख्यमंत्री से पूछा कि राज्य में कितने STP संचालित हैं और कितने निर्माणाधीन हैं। साथ ही उन्होंने पिछले सत्रों में दिए गए जवाबों का हवाला देते हुए कहा कि हर बार अधिकतर योजनाओं को “प्रक्रियाधीन” बताया जाता है।
विभागीय मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने जवाब में कहा कि STP से जुड़े आंकड़ों में अंतर को लेकर विस्तृत विवरण सदन को दिया गया है। उन्होंने बताया कि 96 STP की निर्माण प्रक्रिया चल रही है और 101 नगरीय निकायों के लिए एक पुख्ता योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन योजनाओं पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है, उन्हें फिलहाल रोका गया है।
चरणदास महंत ने पलटवार करते हुए कहा कि जानकारी में सुधार की जरूरत है और यदि अधिकारी सदन को गुमराह कर रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई का क्या प्रावधान है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। इस पर मंत्री ने कहा कि जरूरत और प्राथमिकता के अनुसार ही कार्य स्वीकृत किए गए हैं।
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक राजेश मूणत ने खारुन नदी में STP का गंदा पानी मिलने और उसी पानी की सप्लाई किए जाने का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि खारुन नदी में मिल रहा दूषित पानी मंत्री से लेकर रायपुर के आम नागरिक तक पी रहे हैं और पूछा कि इसे रोकने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।
डिप्टी सीएम अरुण साव ने बताया कि इस मामले में एक समिति गठित की गई है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। इस पर राजेश मूणत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे खुद पिछले तीन महीने से क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं और रायपुरवासी लगातार गंदा पानी पी रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या केवल कागजों पर कमेटी बना देने से लोगों को स्वच्छ पानी मिल जाएगा।
इसी बीच भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने प्रदेश में नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखा। उन्होंने बताया कि कवर्धा में 9 करोड़ रुपये का गांजा पकड़ा गया है, रायपुर में गांजा पैकेजिंग की फैक्ट्री सामने आई है और धमतरी में स्कूली छात्र नशे की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पान ठेलों पर खुलेआम नशीली सामग्री बेची जा रही है।
इस पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने सदन को बताया कि राज्य सरकार नशीले पदार्थों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि नशे के नेटवर्क को तोड़ा जा रहा है, इससे जुड़े लोगों की संपत्तियां अटैच की जा रही हैं और प्रदेश में एंटी नार्कोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है।
