नई दिल्ली:– भारतीय रेलवे अपनी लेटलतीफी या किराया बढ़ोतरी के लिए अक्सर चर्चा में रहती है, लेकिन अब संबलपुर स्टेशन पर एक ऐसी अजीबोगरीब घटना हुई जिसने यात्रियों के होश उड़ा दिए। कल्पना कीजिए कि आपके पास कंफर्म टिकट है, आप स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन जब ट्रेन सामने आती है तो पता चलता है कि आपका डिब्बा (कोच) ही गायब है।
यह वाकया संबलपुर-नांदेड़ नागावली सुपरफास्ट एक्सप्रेस (20809) का है। दर्जनों यात्री हाथ में कंफर्म 3AC टिकट लेकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, लेकिन जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर लगी, यात्रियों की आंखें फटी की फटी रह गईं। ट्रेन में BE-2 नाम का कोच गायब था। कोच न पाकर यात्रियों में हड़कंप मच गया और स्टेशन पर भारी अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। गुस्साए यात्री टीटीई (TTE) से भिड़ गए तो कुछ सामान लेकर दूसरे डिब्बों में जबरन घुसने लगे
रेलवे की दलील और समाधान
ईस्ट कोस्ट रेलवे ने इस मामले पर सफाई देते हुए बताया कि कोच को ट्रेन से जोड़ने के दौरान कुछ गंभीर तकनीकी खराबी आ गई थी। सुरक्षा कारणों से संबलपुर से ट्रेन को बिना BE-2 कोच के ही रवाना करना पड़ा। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की समस्या को तब सुलझाया जब ट्रेन विशाखापत्तनम जंक्शन पहुंची। वहां एक नया एसी कोच जोड़ा गया और परेशान यात्रियों को उनकी बर्थ आवंटित की गई। रेलवे अधिकारियों ने इस असुविधा के लिए खेद जताया है।
SMS के माध्यम से दी जा सकती थी जानकारी
रेलवे के नियमों के मुताबिक तकनीकी कारणों से किसी कोच को हटाया जाता है तो रेलवे की जिम्मेदारी बनती है कि वह यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था दे या रिफंड की प्रक्रिया शुरू करे। वैसे, मामले में सबसे बड़ी लापरवाही सूचना के अभाव की रही। यात्रियों का तर्क जायज है कि डिजिटल इंडिया के दौर में ट्रेन से डिब्बा हटाया गया था तो उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस के जरिए पहले जानकारी दी जा सकती थी। इससे यात्री विशाखापत्तनम तक होने वाली शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से बच सकते थे। यह घटना रेलवे के मैनेजमेंट और आपातकालीन संचार प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करती है, क्योंकि महीनों पहले बुकिंग कराने वाले यात्रियों के लिए यह किसी बुरे सपने से कम नहीं था।
