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    महाकुंभ में भगवान शिव के प्रतीक रुद्राक्ष की जबरदस्त डिमांड, जानिए असली-नकली में फर्क और धारण करने के नियम …

    By Tv 36 HindustanFebruary 9, 2025No Comments8 Mins Read
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    प्रयागराज :– महाकुंभ मेले में साधु-संन्यासियों के साथ रुद्राक्ष की भी खूब चर्चा है. महाकुंभ नागा-संन्यासी अपने शरीर पर हजारों रुद्राक्ष पहनकर घूम रहे हैं. रुद्राक्ष वाले बाबा की भी खूब चर्चा है. यहां 7 करोड़ से ज्यादा रुद्राक्ष के दानों और मालाओं से भव्य द्वादश ज्योतिर्लिंग का निर्माण किया गया है. यहां से रुद्राक्ष बांटकर भक्तों को बाबा आशीर्वाद भी दे रहे हैं. यह सब देख रुद्राक्ष की डिमांड भी लोगों के बीच खूब है. यही वजह है कि मेले में पटरी दुकानों, साधु संतों के शिविरों के बाहर रुद्राक्ष और रुद्राक्ष की मालाएं बिक रही हैं.

    मान्यता है कि शिव के आंसुओं से बना है रुद्राक्ष

    पौराणिक कथाओं के अनुसार रुद्राक्ष को भगवान शिव के वरदान के रूप में माना जाता है. कथाओं के मुताबिक रुद्राक्ष का अर्थ ही होता है भगवान शिव के आंसुओं से उत्पन्न एक ऐसा फल जो रुद्र रूप में जाना जाता है. जिसे रुद्राक्ष कहते हैं. ऐसी मान्यता है कि हजारों वर्षों तक आंखें बंद करके ध्यान में बैठे शिव की आंखों से निकलने वाले आंसू से उत्पन्न हुआ रुद्राक्ष साक्षात शिव है. आमतौर पर रुद्राक्ष की माला नागा साधु और संन्यासियों के गले में ज्यादा दिखाई देती है.

    महाकुंभ में हर तरफ क्रेज :सबसे बड़ी बात यह है कि महाकुंभ में रुद्राक्ष के दानों और रुद्राक्ष की मालाओं का जबरदस्त क्रेज है. बाहर से आ रहे लोग सड़क किनारे बिक रही रुद्राक्ष की मालाओं के साथ ही बड़े-बड़े संतों के शिविर के बाहर लगने वाले रुद्राक्ष के दुकानों पर भीड़ जमा कर इसे खरीदने के लिए जुटे हुए हैं. खुद रुद्राक्ष की माला बेचने वाले मान रहे हैं कि इस बार का महाकुंभ उनके लिए सबसे उत्तम साबित हुआ है.

    इस बार टूटे रिकार्ड :हरिद्वार से महाकुंभ में रुद्राक्ष बेचने के लिए पहुंचे संजीव कुमार रुद्राक्ष के एक्सपर्ट हैं और बीते 40 सालों से इस कारोबार से जुड़े हैं. संजीव का कहना है कि मैं 2001 से यहां पर आ रहा हूं, हरिद्वार से हर कुंभ मेले में शामिल होता हूं, मैं जिस बार भी आया हूं पहले कभी इतना रुद्राक्ष नहीं बिका जितना इस बार बिका है. फुटपाथ पर जो डुप्लीकेट रुद्राक्ष बेच रहे हैं, वह भी अच्छी संख्या में रुद्राक्ष बेचे हैं, जो बड़े कारोबारी हैं जो असली रुद्राक्ष बेच रहे हैं उनको भी जबरदस्त फायदा हुआ है.
    रुद्राक्ष पहनने के फायदे :संजीव का कहना है कि रुद्राक्ष धारण करने से लाभ हर व्यक्ति को मिलता है. रुद्राक्ष में शिव का अंश माना जाता है. रुद्राक्ष धारण से काफी लाभ होता है. रुद्राक्ष धारण से स्वभाव और प्रभाव पर असर पड़ता है. बुरी आदतें धीरे-धीरे छूटने लगती हैं. यह मेरा खुद का अनुभव किया हुआ है, जो भी गलत चीजें हैं वह रुद्राक्ष धारण करने के कुछ दिनों के बाद अपने से दूर होने लगेंगी और आध्यात्मिक ऊर्जा अंदर डेवलप होती है.

    रुद्राक्ष पहनने को लेकर भ्रम :संजीव बताते हैं कि रुद्राक्ष को लेकर कई भ्रांतियां बेवजह हैं. रुद्राक्ष को भगवान शिव का अंश माना जाता है. यह साक्षात शिव है. देवी भागवत के 11 अध्याय में यह स्पष्ट लिखा है, रुद्राक्ष लाभ की वस्तु है, नियम की वस्तु नहीं है. हां रुद्राक्ष यदि धारण किए हैं तो इसे रात में उतार कर सोने जाएं, यदि ड्रिंक कर रहे हैं या नॉनवेज का सेवन कर रहे हैं तो आप रुद्राक्ष को पहनने की जगह उसे अपने पॉकेट में रख लें और सुबह स्नान करने के बाद उसे धारण कर लें. रुद्राक्ष हमेशा से ही लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

    रुद्राक्ष के पहचान के तरीके :संजीव का कहना है कि रुद्राक्ष को लाइन के आधार पर माना जाता है. एक मुखी रुद्राक्ष अर्धचंद्राकार के रूप में आता है. उसमें कुछ लोगों ने इसे प्लास्टिक से बना दिया है. पानी में डालने से रुद्राक्ष डूब जाता है, यह रुद्राक्ष की असली पहचान मानी जाती थी, लेकिन प्लास्टिक का रुद्राक्ष बनाने वालों ने ऐसे रूद्राक्ष तैयार किया है कि वह भी पानी में डूब जाता है. रुद्राक्ष असली और नकली पहचान के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष नॉर्मली नकली नहीं मिलता है. पांच मुखी रुद्राक्ष असली मिलता है लेकिन प्लास्टिक और लकड़ी पहचाना होगा, रुद्राक्ष की असली पहचान तब होती है जब हम उसे धारण करते हैं. रुद्राक्ष अगर पहनने के बाद बॉडी के हिट से टेंपरेचर के आधार पर उसका कलर ब्राउन से ब्लैक होना शुरू हो जाएगा, यदि आपके रुद्राक्ष का दाना या माला तेजी से काली पड़ रही है तो यह समझ लीजिएगा कि वह असली है, यदि वह काली की जगह सफेद पड़ रही है तो यह समझिएगा कि वह नकली है. आम आदमी अगर पहचाना हो तो सबसे आसान तरीका यही है.

    रुद्राक्ष पहनने का तरीका :रुद्राक्ष के बड़े कारोबारी और पूर्वांचल में इसका काम करने वाले संजीव रतन मिश्र बताते हैं कि रुद्राक्ष का अर्थ ही रुद्र का अक्ष यानी भगवान शिव के आंसुओं से हुई उत्पत्ति के रूप में इसे माना जाता है. संजीव का कहना है कि रुद्राक्ष धारण करने के बहुत से नियम बताए जाते हैं. इसे आप अपने गले में अपने कलाइयों में धारण कर सकते हैं. इसे अपने गले में धारण करना सबसे सर्वोत्तम माना गया है. कलाई में 12, कंठ में 36 और हृदय पर 108 दानों के रुद्राक्ष धारण करने का अपना ही महत्व है. एक दाना भी धारण किया जा सकता है, लेकिन संत और संन्यासियों को इस सफेद और गृहस्थ को इसे लाल धागे में ही पहनना चाहिए. रुद्राक्ष धारण करने से पहले इसे रात भर सरसों के तेल में भिगोकर रखना चाहिए और सुबह इसे निकालकर भगवान शिव के आगे पूजा करने के पश्चात धारण करना चाहिए.

    रुद्राक्ष के प्रकार
    एकमुखी रुद्राक्ष जिसे साक्षात शिव का रूप माना जाता है. यह सबसे महंगे रुद्राक्ष के रूप में जाना जाता है और नेपाल में मिलने वाले एकमुखी रुद्राक्ष को सबसे दुर्लभ रुद्राक्ष के रूप में जाना जाता है. इसकी कीमत 50 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक हो सकती है. इसकी पहचान करना बेहद मुश्किल है, क्योंकि अर्द्ध चंद्राकार आकार में होता है और दुर्लभ श्रेणी में आता है.दो मुखी रुद्राक्ष जिसे जुड़वा रुद्राक्ष के रूप में जाना जाता है. इसे शिव पार्वती के रुद्राक्ष के रूप में पूजा जाता है. अर्धनारीश्वर स्वरूप में भी इसका पूजन होता है और इस रुद्राक्ष को अक्सर लोग वैवाहिक समस्या और चंद्रमा के कमजोर होने पर धारण करते हैं.तीन मुखी रुद्राक्ष मंगल दोष के निवारण के लिए होता है और यह लाइनों के जरिए पहचाना जा सकता है. तीन अलग-अलग लाइनों का होना तीन मुखी रुद्राक्ष की पहचान है.चार मुंह वाले रुद्राक्ष को चार मुखी रुद्राक्ष के नाम से जाना जाता है. इसे भगवान ब्रह्मा का स्वरूप माना जाता है और इसे कम लोग ही धारण करते हैं.पांच मुखी रुद्राक्ष शिव का सबसे प्रिय माना जाता है और पांच मुखी रुद्राक्ष को गृहस्थ से लेकर संत सभी धारण कर सकते हैं. इस रुद्राक्ष के बारे में यह कहा जाता है.रुद्राक्ष के दाने जितने छोटे होंगे उतना अच्छा होगा या रुद्राक्ष गले में धारण करने के बाद जब काले होने लगे तो असली होने की पहचान माना जाता है. छोटे दाने मांगें और थोड़े बड़े दाने सस्ते होते हैं. इसी रुद्राक्ष के 108 दानों की माला के जरिए जाप भी किया जाता है.छह मुखी, सात मुखी आठ मुखी और 11 मुखी रुद्राक्ष के साथ ही 21 मुखी रुद्राक्ष भी होते हैं. इन सभी रुद्राक्ष के अलग-अलग फायदे हैं. सबसे ज्यादा एक मुखी और पांच मुखी रुद्राक्ष चर्चा में रहता है.

    असली होने की पहचान इस तरह करें
    रुद्राक्ष को सरसों के तेल में रात भर डुबोकर रखें. यदि वह रंग छोड़े या फिर उसमें चमक आने लगे तो वह नकली है. असली रुद्राक्ष नहीं रंग छोड़ता है न ही उसमें तेल में डूबने के बाद अतिरिक्त चमक आती है.एक मुखी और तीन मुखी के साथ 6 मुखी और 11 मुखी दाने यदि पानी में डूब जाते हैं तो रुद्राक्ष को असली माना जाता है.पांच मुखी रुद्राक्ष जितना हल्का होगा, उसकी माला जितनी हल्की होगी. उसके असली होने की उम्मीद और भी ज्यादा मानी जाएगी. भारी माला लकड़ी या प्लास्टिक की होती है.रुद्राक्ष को किसी नुकीली चीज से कुरेदने पर उसमें रेशा निकलता है. ऐसा रुद्राक्ष असली होता है, यदि उसमें बुरादा निकले तो वह रुद्राक्ष बनाया हुआ नकली होगा.मैग्नीफाइंग ग्लास से देखने पर रुद्राक्ष के अलग-अलग मुख स्पष्ट दिखाई देते हैं, लकीरों की संख्या के जरिए रुद्राक्ष की पहचान की जाती है.रुद्राक्ष को कुछ घंटे पानी में उबलने पर अगर उसका रंग नहीं निकलता है तो वह असली है.असली रुद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से छेद होते हैं नकली में छेद किए जाते हैं, जो स्पष्ट समझ में आते हैं.असली रुद्राक्ष की माला में स्पष्ट रेखाएं होती हैं. जिन्हें अलग-अलग मुख के रूप में जाना जाता है. नकली रुद्राक्ष में इन रेखाओं को बनाया जाता है जो स्पष्ट समझ में आ जाएगी.

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